अचालक या परावैद्युत या विद्युत रोधी किसे कहते है | परिभाषा | उदाहरण

अचालक की परिभाषा (insulator in Hindi) :

अचालक वे पदार्थ होते है जिनसे होकर विद्युत प्रवाह नहीं हो सकता है। अचालकों के सामान्य उदाहरण रबर , प्लास्टिक , काँच , मोम , अभ्रक , एबोनाइट आदि है।

इन पदार्थो में मुक्त इलेक्ट्रॉनों की संख्या नगण्य होती है अर्थात इनमे न के बराबर मुक्त इलेक्ट्रॉन होते होते है या मुक्त इलेक्ट्रॉन अनुपस्थित होते है।

दुसरे शब्दों में यह कहा जा सकता है कि इन पदार्थो के परमाणुओं में सभी इलेक्ट्रॉन बद्ध (बंधे हुए) होते है और वे मुक्त रूप से गति नहीं कर सकते है।

चूँकि अचालकों में मुक्त रूप से विचरण करने वाले आवेश नहीं होते है इसलिए इनसे होकर विद्युत का चालन संभव नहीं है।

यह याद रखने योग्य बात है कि अचालकों को ही परावैद्युत पदार्थ कहते है। स्वभाविक है कि परावैद्युत माध्यमों से भी विद्युत का प्रवाह नहीं हो सकता है लेकिन बाहरी वैद्युत क्षेत्र में रखने पर इन अचालकों (परावैद्युत) की सतह पर प्रेरित आवेश एकत्र हो जाता है।

इस तरह हम परावैद्युत की परिभाषा निम्न प्रकार से दे सकते है –

“वे अचालक पदार्थ जो चालन के बिना विद्युत प्रभाव को प्रदर्शित करते है उन्हें परावैद्युत पदार्थ कहते है। ”

जब चालक पदार्थ को कोई आवेश दिया जाता है तो यह आवेश बहुत तेजी से चालक की सतह पर फ़ैल जाता है लेकिन अचालक को दिया गया आवेश वही पर ठहर कर रह जाता है जहाँ से आवेशित किया गया है।

जब नायलोन या प्लास्टिक की कंघी से सूखे बालों को कंघी करते है तो कंघी आवेशित हो जाती है लेकिन धातु की छड को रगड़ने पर वह आवेशित नहीं होती है क्योंकि उत्पन्न आवेश शरीर से होते हुए पृथ्वी में चले जाते है। शरीर और पृथ्वी दोनों ही विद्युत के चालक है।

जब हम किसी आवेशित वस्तु को पृथ्वी के सम्पर्क में लाते है तो उसका अतिरिक्त आवेश जोड़ने वाली चालक (उदाहरण – हमारा शरीर) में से होते हुए क्षणिक विद्युत धारा उत्पन्न करके भूमि में चला जाता है। आवेश का भूमि में जाना भू-सम्पर्कण (ग्राउंडिंग या अर्थिंग) कहलाता है।

भूसम्पर्कण विधुत परिपथों और अनुप्रयुक्तियो की सुरक्षा के लिए की गयी एक व्यवस्था है। धातु की एक मोटी प्लेट को भूमि में गहराई तक गाडा जाता है और इस प्लेट से मोटे तारों को निकालकर भवनों में इन तारों का उपयोग मुख्य आपूर्ति के निकट भू-सम्पर्कण के लिए किया जाता है।

घरो में आपूर्ति के लिए तीन तारों का उपयोग किया जाता है –

1. उदासीन तार

2. विद्युन्मय तार

3. भूसम्पर्क तार

इनमे उदासीन व विद्युन्मय तार विद्युत् शक्ति को मुख्य लाइन से युक्तियो तक ले जाते है एवं तीसरा तार (भूसम्पर्क तार) भूमिगत प्लेट से जोड़ा जाता है।

प्रेस , टेलिविज़न , रेफ्रीजरेटर , कूलर आदि युक्तियों के आवरण भूसम्पर्क तार से जुड़े होते है।

जब परिपथ में कोई त्रुटी होती है या विद्युन्मय तार का धातु के आवरण से स्पर्श होने पर आवेश भूमि में प्रवाहित हो जाता है और युक्तियो को किसी प्रकार का कोई नुकसान नहीं होता है

अर्थात युक्तियाँ सुरक्षित रह जाती है , साथ ही साथ उपयोग कर्ता को भी कोई हानि नहीं होती है अर्थात विद्युत का झटका आदि नहीं लगता है।

Remark:

दोस्तों अगर आपको इस Topic के समझने में कही भी कोई परेशांनी हो रही हो तो आप Comment करके हमे बता सकते है | इस टॉपिक के expert हमारे टीम मेंबर आपको जरूर solution प्रदान करेंगे|

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