R-C परिपथ में प्रत्यावर्ती वोल्टता तथा प्रत्यावर्ती धारा के मध्य कला संबंध तथा फेजर आरेख

R-C परिपथ में प्रत्यावर्ती वोल्टता तथा प्रत्यावर्ती धारा के मध्य कला संबंध तथा फेजर आरेख :  चित्रानुसार जब किसी परिपथ में एक प्रत्यावर्ती स्रोत V के साथ संधारित्र C तथा प्रतिरोध R जुड़ा हो तो इस प्रकार के परिपथ को RC परिपथ कहते है।

इस परिपथ के लिए धारा तथा वोल्टता की कला में क्या सम्बन्ध होगा इसकी गणना हम यहाँ करने वाले है।
जब स्विच SW को चालु करते है तो परिपथ में प्रत्यावर्ती धारा प्रवाहित होना शुरू हो जाती है जिससे प्रतिरोध तथा संधारित्र के सिरों पर विभवान्तर उत्पन्न हो जाता है।
माना प्रतिरोध के सिरों पर उत्पन्न विभवान्तर VR है तथा संधारित्र के सिरों पर उत्पन्न विभवान्तर का मान VC है।
यदि परिपथ में सिर्फ प्रतिरोध होता तो धारा तथा वोल्टता समान कला में होते तथा यदि परिपथ में सिर्फ संधारित्र होता तो विभवान्तर (वोल्टता) धारा से कला में π/2 पीछे होता , ऐसा हम पीछे अध्ययन कर चुके है।
मान लेते है  प्रत्यावर्ती धारा I = I0sinwt है।
प्रतिरोध के सिरों के मध्य विभवान्तर V= V0sinwt उत्पन्न होता है।
तथा संधारित्र के सिरों के मध्य विभवान्तर V= V0sin(wt – π/2 ) है।
इन तीनो मानों को लेकर यदि इसे सदिश निरुपित किया जाए तो यह निम्न प्रकार प्राप्त होता है

हल करने पर हमें धारितीय प्रतिघात का मान निम्न प्राप्त होता है

RC परिपथ में विभवान्तर का वर्ग माध्य मूल मान निम्न होगा

ऊपर निरुपित किये गए सदिश डायग्राम को देखकर यह स्पष्ट होता है की RC परिपथ में विभवान्तर , धारा से कला में पीछे है।

Remark:

दोस्तों अगर आपको इस Topic के समझने में कही भी कोई परेशांनी हो रही हो तो आप Comment करके हमे बता सकते है | इस टॉपिक के expert हमारे टीम मेंबर आपको जरूर solution प्रदान करेंगे|

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