UP Board Solutions for Class 10 Social Science Project Work (प्रोजेक्ट कार्य)

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UP Board Solutions for Class 10 Social Science Project Work (प्रोजेक्ट कार्य)

प्रोजेक्ट कार्य-1

UP Board Solutions for Class 10 Social Science Project Work (प्रोजेक्ट कार्य) 1
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UP Board Solutions for Class 10 Social Science Project Work (प्रोजेक्ट कार्य) 2
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समस्या कथन
किसी राष्ट्रीयकृत अथवा प्राइवेट बैंक की शाखा में जाकर बचत खाते में लगने वाले साधारण ब्याज के आगणन की जानकारी प्राप्त करना।

प्रस्तावना

जब हम अपने बचत खाते में धनराशि जमा करते हैं तो उस राशि को बैंक या तो जनसाधारण को लोन के रूप में देता है या सरकार उस राशि का प्रयोग सार्वजनिक कार्यों के लिए करती है। बैंक खाताधारकों के धन का प्रयोग करने के प्रतिफल में खाताधारक को एक निर्धारित दर से ब्याज प्रदान करते हैं। यह प्रक्रिया ठीक उसी प्रकार है, जब कोई व्यक्ति किसी महाजन या बैंकर से कुछ धन उधार लेता है। तो वह उधार लिया मूलधन निश्चित समय एवं ब्याज की अतिरिक्त राशि के साथ देता है। इस प्रकार, यह अतिरिक्त धन ही ब्याज है। मूलधन और ब्याज के योग को मिश्रधन कहते हैं। बैंक बचत खाते में जितने वर्ष, माह, दिन के लिए खाताधारकों की धनराशि को जमा रखता है, उसके अनुसार ब्याज की राशि खाताधारक के खाते में निश्चित समय-अन्तराल पर जमा करता है। बैंकों में यह एक साधारण प्रक्रिया है, जो सभी खाताधारकों को सामान्य रूप से प्रदान की जाती है।

पहले बैंक बचत खाते में जमा धनराशि के लिए ब्याज माह के हिसाब से प्रदान करते थे जिसकी गणना के लिए उसे वर्ष में बदलने के लिए 12 से भाग देना पड़ता था, लेकिन वर्तमान में बैंक प्रतिदिन के हिसाब से बचत खाते की शेष धनराशि पर ब्याज की गणना करते हैं जिसकी गणना के लिए दिनों को वर्ष में बदलने हेतु 365 से भाग देना पड़ता है। इस क्रिया में जिस दिन धन दिया जाता है, उसे छोड़ दिया जाता है और जिस दिन धन जमा किया जाता है, उसे सम्मिलित कर लिया जाता है। इस प्रकार बचत खाते में जमा धनराशि पर ब्याज की गणना निम्नलिखित सूत्र के माध्यम से की जाती है

वर्तमान में ब्याज की गणना बैंक कम्प्यूटर के माध्यम से करते हैं और त्रैमासिक रूप से ब्याज की धनराशि खाताधारक के खाते में क्रेडिट कर दी जाती है।

लक्ष्य, उद्देश्य एवं कार्य-प्रणाली
प्रस्तुत परियोजना कार्य का मुख्य उद्देश्य बैंकों द्वारा की जाने वाली ब्याज की गणना का मूल्यांकन कर उस विधि का अध्ययन करना है। इसका मुख्य लक्ष्य विद्यार्थियों को बैंक द्वारा दिए जाने वाले ब्याज आगणन की प्रक्रिया से अवगत कराना है। इस परियोजना कार्य के लक्ष्य एवं उद्देश्य की पूर्ति हेतु आनुभाविक शोध प्रणाली (Empirical Research Method) का प्रयोग किया जाता है।

बैंक की ब्याज नीति का निर्धारण
1 अप्रैल, 2010 से देश के करीब 62 करोड़ बचत खाताधारकों के लिए बैंक द्वारा एक नई शुरुआत की गयी। इस दिन से सभी खाताधारकों को बचत खाते में जमा राशि पर प्रतिदिन के हिसाब से ब्याज प्रदान किया जा रहा है। ब्याज की दर तो 4% ही रखी गयी, लेकिन नई गणना से ब्याज से प्राप्त होने वाली आय पर काफी फर्क पड़ा है।

इस नियम की घोषणा 21 अप्रैल, 2009 को वित्त वर्ष 2009-10 की वार्षिक मौद्रिक नीति पेश करते हुए रिजर्व बैंक के गवर्नर डॉ० डी० सुब्बाराव ने की थी, लेकिन बैंकों के शीर्ष संगठन इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (आईबीए) का कहना था कि रोजाना के आधार पर ब्याज की गणना तभी संभव है जब वाणिज्यिक बैंकों की सभी शाखाओं का कम्प्यूटरीकरण पूरा हो जाए। इसलिए सभी वाणिज्यिक बैंकों के बचत खातों पर ब्याज की गणना 1 अप्रैल, 2010 से प्रतिदिन के आधार पर करने का प्रस्ताव पारित किया
गया।

यह भी ध्यान देने योग्य है कि बैंक चालू खाते में ओवरड्राफ्ट पर अपने ब्याज की गणना प्रतिदिन के आधार पर करते हैं, इसलिए बचत खाते में प्रतिदिन की गणना से ही खाताधारक को ब्याज दिया जाना चाहिए। वास्तव में चालू और बचत खाते बैंकों के लिए फंड जुटाने का सबसे सरल एवं सुलभ माध्यम हैं।

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बैंक द्वारा बचत खाते में की जाने वाली साधारण ब्याज की गणना
बैंक की पास बुक में से ली गयी प्रविष्टियों में ब्याज आगणन की प्रक्रिया का वर्णन निम्नलिखित है

प्रतिदिन के आधार पर ब्याज की गणना

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उपर्युक्त प्रविष्टियों में बचत खाते में जमा राशि की प्रतिदिन की शेष राशि पर ब्याज की गणना की गयी है। बैंक द्वारा त्रैमासिक रूप से ब्याज की धनराशि खाते में समायोजित की जाती है। उपरोक्त गणना में 4 प्रतिशत की दर से प्रतिदिन के शेष पर ब्याज अभिकलित किया गया है। अभीष्ट ब्याज की गणना हेतु निम्नलिखित सूत्र का प्रयोग किया गया है

अतः 1 जनवरी से 31 जनवरी तक कुल ब्याज = 14.465 +37260 = ₹ 51.725
इसी प्रकार फरवरी और मार्च माह के ब्याज की गणना कर तीनों माह के योग 162.96 अर्थात् 163 को खाते में समायोजित किया गया है।
ब्याज की गणना इस प्रकार संयुक्त रूप से भी की जा सकती है

निष्कर्ष
प्रस्तुत परियोजना के माध्यम से हमने बैंक की शाखा में जाकर बचत खाते पर मिलने वाले ब्याज की दर ज्ञात की तथा उसकी गणना के बारे में बैंक अधिकारियों से विस्तारपूर्वक चर्चा की। इसके अलावा उनके द्वारा बताई गई आगणन विधि से तीन माह की प्रविष्टियों पर दिए गए ब्याज की गणना की। बैंक की पासबुक में मुद्रित प्रविष्टियों के अनुसार सत्यापन कर हमने बचत खाते पर प्रतिदिन के आधार पर मिलने वाले ब्याज की धनराशि का आगणन करना सीखा और पासबुक में की गयी प्रविष्टियों का गहन अध्ययन किया। प्रस्तुत परियोजना कार्य से हमारे ज्ञान में वृद्धि होने के साथ-साथ हमें नवीन जानकारियाँ प्राप्त करने का अवसर प्राप्त हुआ।

प्रोजेक्ट कार्य-2

समस्या कथन
स्थायी खाता संख्या (PAN) कार्ड बनवाने हेतु आवेदन की प्रक्रिया की जानकारी प्राप्त करना।

प्रस्तावना
पैन कार्ड एक विशिष्ट पहचान कार्ड है जिसे स्थायी खाता संख्या (Permanent Account Number) कहा जाता है, जो किसी भी तरह के आर्थिक लेन-देन के लिए आवश्यक है। पैन कार्ड में एक अल्फान्यूमेरिक 10 अंकों की संख्या होती है, जो आयकर विभाग द्वारा निर्धारित की जाती है। यह सम्पूर्ण प्रक्रिया केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) के अन्तर्गत आती है। इसके अलावा यह भी उल्लेखनीय है कि पैन कार्ड आयकर अधिनियम 139A के तहत जारी किए जाते हैं। पैन कार्ड के अल्फान्यूमेरिक अंकों के प्रत्येक शब्द का अर्थ निम्नलिखित होता है
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पैन का उपयोग
पैन का उपयोग इन कार्यों के लिए अनिवार्य रूप से किया जाता है

  • आयकर (आईटी) रिटर्न दाखिल करने के लिए।
  • शेयरों की खरीद-बिक्री हेतु डीमैट खाता खुलवाने के लिए।
  • एक बैंक खाते से दूसरे बैंक खाते में है 50,000 या उससे अधिक की राशि निकालने अथवा जमा करने अथवा हस्तांतरित करने पर।
  • टीडीएस (टैक्स डिडक्शन एट सोर्स) जमा करने एवं वापस पाने के लिए।

प्राप्त करने की पात्रता
कोई भी व्यक्ति, फर्म या संयुक्त उपक्रम पैन कार्ड के लिए आवेदन कर सकता है। इसके लिए कोई न्यूनतम अथवा अधिकतम उम्र सीमा नहीं है।

पैन हेतु आवेदन करने के लिए जरूरी दस्तावेज

  • अच्छी गुणवत्ता वाली पासपोर्ट आकार की दो रंगीन फोटो।
  • शुल्क के रूप में है 107 का डिमांड ड्राफ्ट या चेक एवं विदेश के दिये गये पते पर बनवाने के लिए ₹ 994 का ड्राफ्ट बनवाना जरूरी है।
  • व्यक्तिगत पहचान के प्रमाण की छायाप्रति।
  • आवासीय पते के प्रमाण की छायाप्रति।
  • व्यक्तिगत पहचान व आवासीय पता पहचान दोनों सूची में से अलग-अलग दो दस्तावेज जमा करें।

व्यक्तिगत पहचान के लिए प्रमाण – (निम्न में से कोई भी एक प्रमाण-पत्र)

  1. विद्यालय परित्याग प्रमाण-पत्र
  2. मैट्रिक का प्रमाण-पत्र
  3. मान्यताप्राप्त शिक्षण संस्थान की डिग्री
  4. डिपोजिटरी खाता विवरण
  5. क्रेडिट कार्ड का विवरण
  6. बैंक खाते का विवरण/बैंक पासबुक
  7. पानी का बिल
  8. राशन कार्ड
  9. सम्पत्ति का मूल्यांकन आदेश
  10. पासपोर्ट
  11. मतदाता पहचान-पत्र
  12. ड्राइविंग लाइसेंस
  13. सांसद/विधायक/नगरपालिका पार्षद अथवा किसी राजपत्रित अधिकारी द्वारा हस्ताक्षरित पहचान प्रमाण-पत्र।

आवासीय पते के प्रमाण के लिए – (निम्न में से कोई भी एक प्रमाण-पत्र)

  1. बिजली बिल
  2. टेलीफोन बिल
  3. डिपोजिटरी खाता विवरण
  4. क्रेडिट कार्ड का विवरण
  5. बैंक खाता विवरण/बैंक पासबुक
  6. घर किराये की रसीद
  7. नियोक्ता का प्रमाण-पत्र
  8. पासपोर्ट
  9. मतदाता पहचान-पत्र
  10. सम्पत्ति का मूल्यांकन आदेश
  11. ड्राइविंग लाइसेंस
  12. राशन कार्ड
  13. सांसद/विधायक/नगरपालिका पार्षद अथवा किसी राजपत्रित अधिकारी द्वारा हस्ताक्षरित पहचान प्रमाण-पत्र।

ध्यान दें – यदि आवासीय पते के प्रमाण के लिए क्रम संख्या 1 से 7 तक में उल्लिखित दस्तावेज का उपयोग किया जा रहा हो तो वह जमा करने की तिथि से एक माह से अधिक पुराना नहीं होना चाहिए।

पैन कार्ड के लिए शुल्क भुगतान की प्रक्रिया

  • पैन आवेदन के लिए शुल्क ₹ 107 है (93.00 + 15% सेवा शुल्क)
  • शुल्क का भुगतान डिमांड ड्राफ्ट, चेक अथवा क्रेडिट कार्ड द्वारा किया जा सकता है।
  • डिमांड ड्राफ्ट या चेक NSDL-PAN के नाम से बना होना चाहिए।  डिमांड ड्राफ्ट मुम्बई में भुगतेय होना चाहिए और डिमांड ड्राफ्ट के पीछे आवेदक को नाम तथा पावती संख्या लिखी होनी चाहिए।
  • चेक द्वारा शुल्क का भुगतान करने वाले आवेदक देशभर में एचडीएफसी बैंक की किसी भी शाखा पर भुगतान कर सकते हैं। आवेदक को जमा पर्ची पर NSDLPAN का उल्लेख करना चाहिए।

पैन कार्ड के लिए आवेदन प्रपत्र 49A भरने की प्रक्रिया
पैन कार्ड हेतु आवेदन करने के लिए फॉर्म 49A भरकर निर्धारित शुल्क व आवश्यक दस्तावेजों के साथ प्रेषित किया जाता है। आवेदन-पत्र की प्रविष्टियाँ निम्नलिखित क्रम में स्पष्ट रूप से भरनी चाहिए तथा फॉर्म के दोनों ओर फोटो लगाकर हस्ताक्षर करने के स्थान पर हस्ताक्षर करने चाहिए।

कॉलम-1 :

  • इस कॉलम में आवेदक का पूरा नाम अंग्रेजी के कैपिटल अक्षरों में भरा जाता है।

कॉलम-2 :

  • इस कॉलम में आवेदक अपने नाम के पदबंध (Abbreviation) का संक्षिप्त रूप दर्ज कर सकता है।

कॉलम-3 :

  • इस कॉलम में यदि आवेदक को किसी अन्य नाम से भी जाना जाता है तो उसकी सूचना दर्ज करनी चाहिए। नाम को पहला, मध्य व अन्तिम अक्षर स्पष्ट रूप से लिखना चाहिए।

कॉलम-4 :

  • इस कॉलम में आवेदक अपना लैंगिक विभेद पुरुष/महिला पर निशान लगाकर स्पष्ट करता है।

कॉलम-5 :

  • इस कॉलम में अर्विदक को अपनी जन्मतिथि तथा कम्पनी, ट्रस्ट फर्म आदि की स्थापना तिथि दर्ज करनी चाहिए।

कॉलम-6 :

  • इस कॉलम में आवेदक के पिता का नाम लिखने के लिए स्थान दिया जाता है।

कॉलम-7 :

  • इस कॉलम में आवेदक का पूरा पता तथा उसके कार्यालय का पूरा पता दर्ज करने के लिए मकान नं०, भवन का नाम, पोस्ट ऑफिस, मोहल्ले का नाम, शहर व प्रदेश का नाम, पिन नम्बर तथा राष्ट्र के नाम के लिए पृथक्-पृथक् स्थान दिया होता हे।

कॉलम-8 :

  • इस कॉलम में संचार के लिए प्रयुक्त होने वाला पता; यथा-निवास अथवा कार्यालयी दोनों में से किसी एक पर सही () का निशान लगाकर सहमति प्रकट करनी होती है।

कॉलम-9 :

  • इस कॉलम में आवेदक का फोन नम्बर, मोबाइल नम्बर व ईमेल एड्रेस लिखने का स्थान होता है।

कॉलम-10 :

  • इस कॉलम में आवेदक के स्तर; यथा-व्यक्तिगत, कम्पनी, सरकारी, ट्रस्ट आदि में उपयुक्त कॉलम पर सही (V) का निशान लगाना होता है।

कॉलम-11 :

  • इस कॉलम में यदि आवेदन किसी कम्पनी या फर्म की ओर से किया जा रहा हो तो उसकी पंजीकरण संख्या दर्ज करनी चाहिए।

कॉलम-12 :

  • इस कॉलम में यदि आवेदक भारत का नागरिक है तो उसका आधार नम्बर निर्धारित स्थान पर लिखना चाहिए।

कॉलम-13 :

  • इस कॉलम में आवेदक की आय के स्रोत; जैसे-वेतन, व्यवसाय, किराया, कैपिटल गेन या अन्य स्रोतों से होने वाली आय का विवरण दर्ज किया जाता

कॉलम-14 :

  • इस कॉलम में ऐसे प्रतिनिधि का नाम वे पूरा पता दर्ज किया जाता है, जो आवेदक की अनुपस्थिति में आयकर निर्धारण हेतु आवेदक के प्रतिनिधि के रूप में भूमिका निभायेगा।

कॉलम-15 :

  • इस कॉलम में पहचान-पत्र एवं निवास प्रमाण-पत्र के सन्दर्भ में सूचना दर्ज की जाती है जो कि इस आवेदन-पत्र के साथ संलग्न किए जा रहे हों।

कॉलम-16 :

  • इस कॉलम में आवेदक द्वारा घोषणा कथन पर हस्ताक्षर कर स्पष्ट किया जाता है कि उसके द्वारा दर्ज की गयी सभी जानकारियाँ पूर्ण सत्य हैं।

अन्त में स्थान, दिनांक व हस्ताक्षर करने हेतु बने कॉलमों में प्रविष्टियाँ करके फॉर्म को पूर्ण किया जाता है तथा पैन आवेदन संग्रह केन्द्र के कार्यालय में प्रेषित किया जाता है।

निष्कर्ष
प्रस्तुत परियोजना के माध्यम से हमने पैन कार्ड आदि के सम्बन्ध में विस्तृत जानकारी प्राप्त की। इसके अतिरिक्त पैन कार्ड के आवेदन हेतु प्रयुक्त किए जाने वाले फॉर्म सं० 49 A के प्रत्येक कॉलम को भरने एवं उसके सम्बन्ध में पूरी जानकारी का अध्ययन किया। परियोजना कार्य हेतु संगृहीत की गयी जानकारी वास्तव में अत्यन्त बोधगम्य एवं रोचक सिद्ध हुई।

प्रोजेक्ट कार्य-3

समस्या कथन
आधार कार्ड बनवाने हेतु आवेदन की प्रक्रिया की जानकारी प्राप्त करना।

प्रस्तावना
आधार कार्ड भारत सरकार द्वारा भारत के नागरिकों को जारी किया जाने वाला एक पहचान-पत्र है। इसमें 12 अंकों की एक विशिष्ट संख्या मुद्रित होती है जिसे भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (भा०वि०प०प्रा०) जारी करती है। यह संख्या भारत में कहीं भी व्यक्ति की पहचान और पते का प्रमाण होता है। भारतीय डाक द्वारा प्राप्त और यू०आई०डी०ए०आई० की वेबसाइट से डाउनलोड किया गया ई-आधार दोनों ही समान रूप से मान्य हैं। कोई भी व्यक्ति आधार के लिए नामांकन करा सकता है बशर्ते वह भारत का निवासी हो और यू०आई०डी०ए०आई० द्वारा निर्धारित सत्यापन प्रक्रिया को पूरा करती हो, चाहे उसकी उम्र और लिंग (जेण्डर) कुछ भी हो। प्रत्येक व्यक्ति केवल एक बार नामांकन करा सकता है। इसका नामांकन निशुल्क है तथा यह नागरिकता का प्रमाण-पत्र न होकर एक पहचान-पत्र मात्र है। UIDAI की प्रथम अध्यक्षा नंदन नीलेकणि हैं। UIDAI का लक्ष्य आगामी वर्षों में सम्पूर्ण भारतवर्ष के लोगों को आधार नम्बर जारी करने का है।

लक्ष्य, उद्देश्य एवं कार्य-प्रणाली
प्रस्तुत परियोजना कार्य का मुख्य उद्देश्य आधार कार्ड की आवेदन प्रक्रिया का अध्ययन करना है। इसका मुख्य लक्ष्य आधार कार्ड की आवश्यकता, लाभ व उपयोगिता की जानकारी प्राप्त करना है। इसके उद्देश्य एवं लक्ष्य की प्राप्ति हेतु आनुभाविक शोध विधि का प्रयोग किया गया है और जनसेवा केन्द्र पर जाकर आधार कार्ड का आवेदन-पत्र प्राप्त करके, उसे भरने एवं संलग्न होने वाले दस्तावेजों, डेमोग्राफिक
और बायोमैट्रिक सूचनाओं के संकलन की जानकारी प्राप्त कर इस परियोजना कार्य को पूर्ण करने का प्रयास किया गया है।

आधार कार्ड के लाभ
आधार कार्ड के लाभों का संक्षिप्त वर्णन निम्नलिखित है

  1. आधार एक 12 अंकों की प्रत्येक भारतीय की एक विशिष्ट पहचान है।
  2. आधार कार्ड भारत के प्रत्येक निवासी के पहचान-पत्र के रूप में प्रमाण है।
  3. आधार कार्ड डेमोग्राफिक और बायोमैट्रिक आधार पर प्रत्येक व्यक्ति की विशिष्ट पहचान सिद्ध करता है।
  4. यह एक स्वैच्छिक सेवा है जिसका प्रत्येक निवासी लाभ उठा सकता है, चाहे वर्तमान में उसके पास कोई भी दस्तावेज हो।
  5. आधार कार्ड के माध्यम से प्रत्येक व्यक्ति को केवल एक ही विशिष्ट पहचान आधार नम्बर दिया जाता है।
  6. आधार वैश्विक इन्फ्रास्ट्रक्चर पहचान प्रदान करता है, जो कि राशन कार्ड, पासपोर्ट आदि जैसी पहचान आधारित ऐप्लिकेशन द्वारा भी प्रयोग में लाया जा सकता है।
  7. यू०आई०डी०ए०आई० किसी भी तरह के पहचान प्रमाणीकरण से सम्बन्धित प्रश्नों के हाँ/नहीं में उत्तर प्रदान करेगा।
  8. आधार संख्या को बैंकिंग, मोबाइल फोन कनेक्शन और सरकारी व गैर-सरकारी सेवाओं की सुविधाएँ प्राप्त करने में प्रयोग किया जा सकता है।

आधार कार्ड की आवश्यकता और उपयोग
आधार कार्ड पहचान-पत्र तथा निवास प्रमाण-पत्र के रूप में सभी सरकारी एवं गैर-सरकारी विभागों में जरूरी हो गया है; क्योंकि पहचान के लिए हर जगह आधार कार्ड माँगा जाता है। आधार कार्ड के महत्त्व को बढ़ाते हुए भारत सरकार ने भी बड़े फैसले लिए हैं जिसमें निम्नलिखित कार्यों के लिए आधार संख्या दर्ज कराना अनिवार्य कर दिया गया है

  1. पासपोर्ट जारी करने के लिए आधार को अनिवार्य कर दिया गया है।
  2. बैंक में जनधन खाता खोलने के लिए
  3. एलपीजी की सब्सिडी पाने के लिए।
  4. ट्रेन टिकट में छूट पाने के लिए।
  5. परीक्षाओं में बैठने के लिए (जैसे—आईआईटी जेईई के लिए)
  6. बच्चों को नर्सरी कक्षा में प्रवेश दिलाने के लिए।
  7. डिजिटल जीवन प्रमाण-पत्र (लाइफ सर्टिफिकेट) के लिए
  8. प्रॉविडेंट फंड के भुगतान के आवेदन हेतु
  9. डिजिटल लॉकर के लिए।
  10. सम्पत्ति के रजिस्ट्रेशन के लिए
  11. छात्रों को दी जाने वाली छात्रवृत्ति को बैंक में जमा कराने हेतु
  12. सिम कार्ड खरीदने के लिए।
  13. आयकर रिटर्न हेतु। आयकर विभाग करदाताओं को आधार कार्ड के जरिए आयकर रिटर्न की ई-जाँच करने की सुविधा प्रदान करता है।

आधार कार्ड के आवेदन की प्रक्रिया
आधार कार्ड के आवेदन प्रपत्र में निम्नलिखित सूचनाएँ संदर्भित विषय-वस्तु के अनुसार भरी जाती हैं

कॉलम-1 :

  • इस कॉलम में नामांकन संख्या उपलब्ध हो तो अवश्य भरनी चाहिए।

कॉलम-2 :

  • इस कॉलम में राष्ट्रीय रजिस्टर का रसीद नम्बरे अथवा टिन नम्बर भरना चाहिए।

कॉलम-3 :

  • इस कॉलम में दिए गए स्थान पर आवेदक को पूरा पता लिखना चाहिए।

कॉलम-4 :

  • इस कॉलम में लैंगिक विभेद अर्थात् पुरुष/स्त्री व अन्य में से उपयुक्त स्थान पर सही (V) का निशान लगाना चाहिए।

कॉलम-5 :

  • इस कॉलम में जन्मतिथि का विवरण भरना चाहिए।

कॉलम-6 :

  • इस कॉलम में पते से सम्बन्धित विवरण दर्ज करना चाहिए।

कॉलम-7 :

  • इस कॉलम में माता, पिता, पति, पत्नी आदि से सम्बन्धित जानकारी; यथा–नाम व आधार नम्बर, जन्मतिथि आदि का विवरण दर्ज करना चाहिए।

कॉलम-8 :

  • इस कॉलम में अनापत्ति कथन पर सही (V) अथवा गलत (४) का निशान ” लगाकर सहमति/असहमति प्रकट करनी चाहिए।

कॉलम-9 :

  • इस कॉलम में आधार संख्या को अन्य सरकारी विभागों; जैसे—बैंक, आदि से जोड़ने के लिए अनापत्ति कथन हेतु सहमति प्रकट करना और बैंक का नाम, खाता संख्या आदि दर्ज करना चाहिए।

कॉलम-10 :

  • इस कॉलम में संलग्न किए जाने वाले दस्तावेजों; जैसे-पहचान पत्र, निवास प्रमाण-पत्र, सम्बन्ध प्रमाण-पत्र तथा जन्म प्रमाण-पत्र आदि पर सही (V) का निशान लगाकर उस आवेदन-पत्र के साथ संलग्न करना चाहिए।

कॉलम-11 :

  • इस कॉलम में पहचान आधारित विवरण भरना चाहिए जिसमें माता, पिता, पति, पत्नी, अभिभावक आदि की जानकारी दर्ज की जाती है जिसमें मुख्य रूप से उनकी आधार संख्या दर्ज करनी चाहिए।

अन्त में, आवेदन पत्र में भरी गयी जानकारियों के सत्यापन के लिए मुद्रित कथन के नीचे हस्ताक्षर करके तथा पहचानकर्ता को नाम लिखकर एवं हस्ताक्षर कराकर जनसेवा केन्द्र या डाक घर में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर आधार कार्ड के लिए आवेदन कर सकते हैं। सक्षम अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत होकर बायामैट्रिक माध्यम से अपने हाथों की अँगुलियों की छाप, आँखों के इम्प्रेशन तथा फोटो खिंचवाने की प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद सक्षम अधिकारी अगली कार्यवाही के लिए फॉर्म को अग्रसारित करते हैं तथा एक से दो सप्ताह के भीतर डाक के माध्यम से आधार कार्ड दिए गए पते पर पहुँच जाता है।

निष्कर्ष
प्रस्तुत परियोजना कार्य के माध्यम से हमने जनसेवा केन्द्र पर जाकर आधार कार्ड के आवेदन से सम्बन्धित पूर्ण जानकारी का अध्ययन किया और आवेदन प्रपत्र भरने, आधार कार्ड के लाभों, आवश्यकता और उपयोग के बारे में विस्तृत जानकारी अर्जित की। इस परियोजना कार्य से यह भी ज्ञात हुआ कि आधार कार्ड प्रत्येक भारतीय को पहचान प्रदान करने वाला महत्त्वपूर्ण दस्तावेज है तथा इसे 12 अंकों की विशिष्ट संख्या द्वारा अनुमोदित किया जाता है। आधार कार्ड को भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण द्वारा जारी किया जाता है; अतः हमें इस परियोजना कार्य के माध्मय से ही आधार कार्ड सम्बन्धी महत्त्वपूर्ण जानकारियों को प्राप्त करने का सुअवसर प्राप्त हुआ।

प्रोजेक्ट कार्य-4

समस्या कथन
व्यक्तिगत आयकर किस प्रपत्र पर और कैसे भरा जाता है? इसकी जानकारी प्राप्त करना।

प्रस्तावना
सरकार को अपने कर्तव्य निभाने के लिए बहुत-से कार्य; जैसे देश की सुरक्षा करना, कानून व्यवस्था बनाये रखना, स्वास्थ्य एवं शिक्षा की सुविधा देना, न्याय-पद्धति को चलाना, बेरोजगारी एवं गरीबी का उन्मूलन करना, आदि करने होते हैं। इन सभी पर सरकार को बहुत अधिक धन व्यय करना पड़ता है।

देश के विकास के लिए और इन सभी कार्यों को करने के लिए इतनी मात्रा में धन सरकार अनेक साधनों से जुटाती है, इनमें से एक महत्त्वपूर्ण साधने को कर प्रणाली (Taxation) कहा जाता है। आयकर, सेवाकर, बिक्री कर, सम्पत्ति कर, मनोरंजन कर, चुंगी शुल्क, सीमा शुल्क आदि सरकार की आय के विभिन्न स्रोत हैं। केन्द्रीय सरकार प्रदेश सरकार अथवा स्थानीय संस्थाएँ किस क्षेत्र में कर लगा सकती है, इसका निर्धारण पहले से ही रहता है। केन्द्र सरकार इन करों का अधिक भाग प्राप्त करती है, इसलिए उसे इन साधनों का कुछ अंश प्रदेश सरकारों या संघीय क्षेत्रों को देना होता है, ताकि वे भी विकास के लिए और दूसरे खर्च करने के लिए इसका उपयोग कर सकें; अतः आयकर सरकार की आय का सबसे बड़ा स्रोत है।

लक्ष्य एवं उद्देश्य
प्रस्तुत परियोजना कार्य का मुख्य उद्देश्य आयकर की जानकारी प्राप्त करना है तथा इसका लक्ष्य आयकर जमा करने की प्रक्रिया से अवगत कराना है जिसके कि विद्यार्थी आयकर के महत्त्व, प्रक्रिया एवं दरों का विधिवत अध्ययन कर सकें।

भारत में आयकर का स्वरूप
आयकर विभाग ने देयकर्ता के लिए टैक्स स्लैब में अनेक परिवर्तन किए हैं, जो वित्तीय वर्ष (2017-18) तथा आकलन वर्ष 2018-19 के लिए हैं। भारत में जहाँ पहले ₹ 2.5 लाख से लेकर ₹ 5 लाख तक की सालाना आय पर 10 फीसदी टैक्स लगता था, अब यह टैक्स 5 फीसदी लगेगा, वहीं ₹ 2.5 लाख तक आय पूरी तरह से टैक्स मुक्त है। इसके अलावा सरकार ने 50 लाख से लेकर 1 करोड़ तक की आय वालों पर 10 फीसदी की सरचार्ज लगाया है, जो अब तक नहीं था। आयकर के नए नियमों के अनुसार इसका संक्षिप्त वर्णन निम्नलिखित है

सामान्य वर्ग के लोगों हेतु आयकर के प्रावधान – 60 वर्ष तक आयु वाले किसी भी व्यक्ति की वार्षिक आय यदि ₹ 2.5 लाख से अधिक है, तब वह टैक्स छूट के दायरे से बाहर माना जाएगा, यानी केवल ₹ 2.5 लाख तक की आय ही करमुक्त है। इसके बाद ₹ 5 लाख तक की सालाना आय वाले व्यक्ति को 5 फीसदी टैक्स का होगा, साथ ही र 5 लाख तक की करयोग्य आय पर पहले ₹ 5 हजार की छूट मिलती थी जोकि अब घटाकर ₹ 2500 कर दी गयी है और यह ₹ 3.5 लाख तक की करयोग्य आय पर मिलेगी। इसका अर्थ यह हुआ कि यदि किसी व्यक्ति की वार्षिक आय ₹ 3 लाख थी तो उसकी टैक्स भुगतान की जिम्मेदारी नहीं थी। आयकर के नए नियमों के अनुसार आयकर का वर्णन निम्नलिखित हैं

₹ 2.5 लाख  तक                                     शून्य
₹ 2.5 लाख 1 से ₹ 5 लाख तक     ……… 5%
₹ 5 लाख 1 से 10 लाख तक          ……… 20%
₹ 10 लाख से अधिव                     ……… 30%

₹ 5 लाख से है 10 लाख की आय पर 20 प्रतिशत आयकर होगा और ₹ 10 लाख से अधिक की आय पर 30 प्रतिशत आयकर लागू होगा, लेकिन यदि आय ₹ 50 लाख से ज्यादा है (सालाना) तथा ₹ 1 करोड़ है, तब सरचार्ज बढ़कर 15 प्रतिशत हो जाएगा। यह बढ़ा हुआ 5 फीसदी सरचार्ज एजुकेशन सेस और हायर एजुकेशन सेस है।

वरिष्ठ नागरिक (60 से 80 आयु वर्ष के लोगों के लिए ) – वरिष्ठ नागरिक जो कि 0 से ₹ 3 लाख सालाना आय के दायरे में आते हैं, उन पर कोई आयकर देनदारी नहीं आती। ₹ 3 से 5 लाख तक की आय पर 5 प्रतिशत की दर से कर लागू होगा। ₹ 5 लाख से ₹ 10 लाख तक की आय और के 10 लाख से अधिक की आय पर सामान्य श्रेणी के लिए लागू कर की दर और सरचार्ज वरिष्ठ नागरिकों पर भी लागू होंगे।

₹ 3 लाख तक                                     …… शून्य
₹ 3 लाख 1 से ₹ 5 लाख तक               …… 5%
₹ 5 लाख 1 से ₹ 10 लाख तक             …… 20%
₹ 10 लाख से अधिक                          …… 30%

अति वरिष्ठ नागरिक ( 80 वर्ष की आयु से अधिक के लोगों के लिए)-वे वरिष्ठ नागरिक जिनकी आयु 80 वर्ष से अधिक है, वे इस श्रेणी में आते हैं। उनके लिए ₹ 5 लाख तक की आय पूरी तरह से कर-मुक्त होगी, परन्तु शेष सभी कर स्लैब वही लागू होंगे जो कि सामान्य श्रेणी पर लागू हैं।

₹ 5 लाख तक                                        ……. शून्य
₹ 5 लाख 1 से ₹ 10 लाख तक                ……. 20
₹ 10 लाख से अधिक                              ……. 30%

UP Board Solutions for Class 10 Social Science Project Work (प्रोजेक्ट कार्य) 9
UP Board Solutions for Class 10 Social Science Project Work (प्रोजेक्ट कार्य) 9

आयकर की दरों का सिंहावलोकन

प्रत्येक वर्ष वित्तीय वर्ष समाप्त होने के बाद वे सभी व्यक्ति आयकर देने के लिए बाध्य हैं, जो आयकर द्वारा निर्धारित कर सीमा के अन्तर्गत आते हैं। आयकर के भुगतान के लिए आयकर विभाग द्वारा पृथक्-पृथक् फॉर्मों के माध्यम से आयकर जमा करने हेतु आवेदन पत्र बनाए गए हैं। इन फॉर्मों के माध्यम से व्यक्ति यह घोषित करता है कि विगत वर्ष में उसे कितनी आय हुई तथा उस आय के लिए कितने कर का भुगतान किया। यही प्रक्रिया इनकम टैक्स रिटर्न कहलाती है। वित्तीय वर्ष समाप्त होने के पश्चात आयकर विभाग, आयकर जमा करने के लिए एक अन्तिम तिथि का निर्धारण करता है। वित्तीय वर्ष 2016-17 के लिए आयकर जमा करने की अन्तिम तिथि 31 जुलाई निर्धारित की गयी है।

व्यक्तिगत आयकर जमा करने के फॉर्म
व्यक्तिगत रूप से आयकर जमा करने के लिए निम्नलिखित फॉर्मों को उनकी श्रेणी के आधार पर भरा जाता है, जिनका वर्णन निम्नलिखित है

ITR-1 :

  • इस फॉर्म को सहज फॉर्म भी कहा जाता है जिनकी आय के साधन उनका वेतन, पेंशन या ब्याज है तथा जिस व्यक्ति के पास अपना घरे हो और उसने हाउसिंग लोन लिया हो, उसे भी यह फॉर्म भरना होता है।

IRT-2 :

  • यह फॉर्म हिन्दू अविभाजित परिवार (HUF) के लिए आयकर जमा करने हेतु भरा जाता है। इसके अतिरिक्त यदि किसी व्यक्ति के आय के साधन वेतन, पेंशन तथा ब्याज के अतिरिक्त एक से ज्यादा घर से आने वाली किराये की धनराशि, कैपिटल गेन या डिविडेंड से प्राप्त होने वाली आमदनी है तो ऐसे लोगों को भी इसी फॉर्म के माध्यम से आयकर जमा करने का प्रावधान है।

TTR-3 :

  • यह फॉर्म उन लोगों के लिए होता है, जो किसी व्यवसाय में साझेदार (Partner) हैं तथा उनकी आय का स्रोत केवल यही है।

ITR-4 :

  • इस फॉर्म को सुगम फॉर्म कहा जाता है। यह फॉर्म सभी प्रकार के प्रोफेशनल्स; जैसे-डॉक्टर, वकील, सी०ए० आदि के लिए होता है। इसके अतिरिक्त वह व्यक्ति जो किसी व्यवसाय में साझेदार होने के साथ-साथ प्रोफेशनल इनकम भी अर्जित करता है, उसके लिए भी यही फॉर्म भरने का प्रावधान है। सुगम फॉर्म के माध्यम से आयकर अधिनियम के सेक्शन 44AD, 44ADA तथा 44AE के अन्तर्गत आयकर जमा कराया जाता है।

ITR-4s :

  • यह फॉर्म उन छोटे व्यापारियों के लिए है जिनकी वार्षिक आय ₹ 60 लाख से कम है तथा ऐसे प्रोफेशनल व्यक्ति जिनकी आय ₹ 60 लाख से कम है, उन्हें भी यही फॉर्म भरना होता है। इन लोगों को अपने खातों को अंकेक्षण (Audit) कराने की आवश्यकता नहीं होती है।

वित्तीय वर्ष समाप्त होने पर प्रत्येक व्यक्ति को उपरोक्त वर्णित फॉर्मों में से उस फॉर्म को भरना होता है जिसके लिए वह पात्र होता है। इस फॉर्म के द्वारा व्यक्ति अपनी वार्षिक आय पर उचित कर का भुगतान करता है। यह कर प्रत्येक व्यक्ति के लिए अलग-अलग होता है; जैसे-वेतन से प्राप्त आय तथा व्यक्तिगत व्यापार करने वालों के लिए अलग। जो व्यक्ति वेतनभोगी हैं, उनके लिए फॉर्म-16 प्रस्तुत करना अनिवार्य होता है। इसमें उस व्यक्ति की सालाना आय बताई जाती है तथा उसके द्वारा किये गये पूँजी सम्बन्धी निवेश पर छूट दी जाती है। यही सब जोड़-घटाकर जो भी शेष राशि होती है, उस पर आयकर का भुगतान किया जाता है। इसी प्रकार, प्रोफेशनले व्यक्ति तथा व्यापारी भी अपने आय-व्यय का ब्यौरा प्रस्तुत करते हैं तथा आर्थिक चिट्ठा बनाकर अपने लाभ-हानि की घोषणा करते हैं। इसी आधार पर वह आयकर का भुगतान करते हैं।

आयकर जमा करने हेतु ITR-1 (सहज) फॉर्म भरने की प्रक्रिया
आयकर का सहज फॉर्म (ITR-1) क्रमशः पाँच खण्डों एवं दो प्रकार की अनुसूचियों से मिलकर बना है। प्रत्येक खण्ड एवं अनुसूची को भरने का वर्णन अग्रलिखित है

1. खण्ड-A : सामान्य जानकारी-सहज फॉर्म के इस भाग में आयकरदाता का पैन, आधार कार्ड नम्बर, मोबाइल नम्बर, ई-मेल, पूरा पता, निवास की स्थिति, सम्बद्धता; यथा–सरकारी कर्मचारी, पी०एस०यू० या अन्य, आयकर भरने की मूल तिथि, यदि फॉर्म में संशोधन हो तो उसकी फॉर्म संख्या, या किसी प्रकार के नोटिस का सन्दर्भ हो तो नोटिस संख्या भरने के लिए नियत स्थान एवं कॉलमों में जानकारी भरनी चाहिए।

2. खण्ड-B:
सकल कुल आय-इस खण्ड में कुल आय के स्रोतों की जानकारी भरनी होती है; जैसे-वेतन, पेंशन, एक गृह सम्पत्ति से आय, अन्य स्रोतों से आय यदि हो तो इनमें से जिस भी स्रोत से आय हो उसके वर्षभर का योग निर्धारित कॉलम में लिखना चाहिए तथा अन्त में कुल योग करना चाहिए।

3. खण्ड-c :
करयोग्य कुल आय में से कटौतियाँ—इस खण्ड में करयोग्य कुल आय में से वित्तीय वर्ष में किए गए ऐसे निवेशों को घटाया जा सकता है, जो आयकर की धारा 80C, 80D, 80G या 80 TTA में करमुक्त हैं। ऐसे निवेशों की जानकारी अथवा धनराशि निर्धारित कॉलम में लिखनी चाहिए जिससे आयकर में छूट प्राप्त की जा सके।

4. खण्ड-D :
देयकर की गणना-इस खण्ड में देय योग्य कर की गणना की जाती है। इसके कॉलम D1 में कुल आय पर देय कर की संख्या लिखी जाती है। कॉलम D2 में सेक्शन 87A में कर से छूट, यदि कोई हो तो उसकी संख्या लिखी जाती है। D3 कॉलम में छूट प्राप्ति के बाद कुल कर योग्य धनराशि लिखी जाती है। कॉलम D4 में उपकर या सेस की धनराशि का वर्णन किया जाता है तथा Ds कॉलम में कर एवं सेस का कुल योग लिखा जाता है। कॉलम D6 में सेक्शन 89(1) के अन्तर्गत प्रदान की जाने वाली कर राहत का ब्यौरा होता है। कॉलम D7, Da एवं Dj में कर पर ब्याज की गणना लिखी जाती है। D10 कॉलम में कुल कर एवं ब्याज को जोड़कर लिखा जाता है। कॉलम D11 में कुल देय कर धनराशि वर्णित की जाती है। D12 कॉलम में D13 कॉलम में यदि किसी प्रकार का कोई प्रतिदेय (Refund) हो तो उसका वर्णन होता है। इस खण्ड के अन्त में करमुक्त आय की सूचना देने के लिए निर्दिष्ट कॉलम होते हैं; जैसे-सेक्शन 10(38), 10 (34), कृषि आय या अन्य आदि।

5. खण्ड-E :
अन्य जानकारी-इस खण्ड में बैंक से सम्बन्धित जानकारियों का वर्णन होता है; जैसे—बैंक का नाम, खाता संख्या, IFSC कोड, खाते में नकद जमा का कुल योग आदि का ब्यौरा दिया जाता है।

6. अग्रिम कर अनुसूची – 
इस अनुसूची में यदि करदाता ने कोई अग्रिम आयकर जमा कराया हो तो उसका विवरण भरना होता है। इसमें बी०एस०आर० कोड, अग्रिम कर जमा करने की तिथि, चालान नम्बर तथा जमा किए गए कर की धनराशि आदि दर्ज करने के पृथक्-पृथक् कॉलमों में सभी विवरण भरा जाता है।

7. टी०डी०एस०/टी०सी०एस० विवरण अनुसूची – 
इस अनुसूची में करदाता यदि वित्तीय वर्ष में किसी से भी भुगतान प्राप्त करते समय टी०डी०एस० कटवा चुका है तो उसका प्रमाण-पत्र प्राप्त करे उसका विवरण यहाँ प्रस्तुत करना चाहिए। इसमें प्रथम कॉलम में टी०डी०एस० काटने वाले का TAN नम्बर भरा जाता है, दूसरे कॉलम में उसका नाम तथा तीसरे कॉलम में जिस राशि पर कर काटा गया है, उसका ब्यौरा लिखा जाता है। चौथे कॉलम में वर्ष तथा पाँचवें कॉलम में उस धनराशि को लिखा जाता है। कि जिसके लिए हमें उस वित्तीय वर्ष क्लेम करना चाहते हैं। सातवें कॉलम में वह राशि लिखी जाती है। जिसका क्लेम आयकरदाता अपने स्वयं के लिए न करके अपनी पत्नी/पति (spouse) के लिए करता है। यह सेक्शन 5A के अन्तर्गत आता है।

8. सत्यापन – 
इसे फॉर्म के अन्त में आयकरदाता द्वारा उपरोक्त जानकारी का सत्यापन किया जाता है जिसके अन्तर्गत आयकरदाता अपना नाम, पिता का नाम लिखकर यह घोषणा करता है कि उपरोक्त सभी जानकारियाँ उसके ज्ञान और विश्वास के अनुरूप सत्य एवं सही हैं तथा आयकर अधिनियम, 1961 के सभी प्रावधानों के अनुरूप हैं। इस प्रकार सत्यापन कथन के नीचे आयकरदाता अपने हस्ताक्षर कर इसे प्रमाणित एवं सत्यापित करता है।

9. फॉर्म प्राप्ति की रसीद – 
इस.फॉर्म के बाएँ ओर कार्यालय प्रयोग हेतु एक बॉक्स होता है जिसमें प्राप्ति संख्या, दिनांक, प्राप्त करने वाले अधिकारी के हस्ताक्षर तथा मोहर लगाने हेतु स्थान होता है। इस फॉर्म को आयकर कार्यालय में जमा करने के उपरान्त आयकरदाता को इसकी प्राप्ति की रसीद प्रदान की। जाती है।

निष्कर्ष
प्रस्तुत परियोजना के माध्यम से हमने आयकर के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त की तथा व्यक्तिगत रूप से व्यक्ति को कितनी आय पर कितने कर का भुगतान करना पड़ता है, उन सभी नियमों का अवलोकन किया। इसके अतिरिक्त व्यक्तिगत आयकर प्रपत्र (ITR-1) सहज फॉर्म किस प्रकार भरा जाता है तथा उसमें क्या-क्या विवरण होता है, इसकी भी जानकारी प्राप्ति की। इस परियोजना कार्य से हम भारत की प्रगतिशील कर नीति, कुशल एवं दक्ष प्रशासन तथा बेहतर स्वैच्छिक अनुपालन के द्वारा आने वाले राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर सकते हैं।

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