UP Board Solutions for Class 10 Social Science Chapter 5 जल संसाधन (अनुभाग – तीन)

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UP Board Solutions for Class 10 Social Science Chapter 5 जल संसाधन (अनुभाग – तीन)

विस्तृत उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
बहु-उद्देशीय परियोजना का अर्थ एवं उद्देश्य लिखिए। भारत के आर्थिक विकास में बहु-उद्देशीय परियोजनाओं के योगदान को लिखिए। [2013]
या

बहु-उद्देशीय नदी-घाटी परियोजना से आप क्या समझते हैं? उसके चार उद्देश्यों पर प्रकाश डालिए। [2014, 17]
या

बहु-उद्देशीय नदी घाटी परियोजनाओं के छः उद्देश्यों का वर्णन कीजिए। [2018]
या

बहु-उद्देशीय नदी-घाटी परियोजना के उद्देश्य एवं महत्त्व का वर्णन कीजिए। [2014]
या

बहुउद्देशीय योजनाओं से आप क्या समझते हैं ? [2010]
या

बहु-उद्देशीय नदी-घाटी परियोजना के चार कार्यों का वर्णन कीजिए। [2011]
या

भारत के किन्हीं तीन बहु-उद्देशीय नदी-घाटी परियोजनाओं के महत्त्वों का उल्लेख कीजिए। [2013]
या

बहु-उद्देशीय नदी-घाटी परियोजना क्या है? इसके किन्हीं पाँच लाभों की विवेचना कीजिए। [2013, 17]
या

बहु-उद्देशीय परियोजना के लाभों पर प्रकाश डालिए। [2011, 13]
या

बहु-उद्देशीय घाटी परियोजना के तीन महत्त्व बताइट। [2015]
उत्तर :
बहु-उद्देशीय परियोजनाएँ वे नदी-घाटी परियोजनाएँ हैं, जिनसे एक ही समय में अनेक उद्देश्यों की पूर्ति होती है। इन योजनाओं को बहुमुखी योजनाएँ भी कहा जाता है। इनसे होने वाले विविध लाभों और देश के आधुनिक विकास में योगदान के कारण इन्हें ‘आधुनिक भारत के मन्दिर’ कहा जाता है। देश के सर्वांगीण आर्थिक विकास एवं क्षेत्रीय नियोजन के लिए बहु-उद्देशीय या बहुध्येयी योजनाओं को क्रियान्वित किया गया है। इन योजनाओं का तात्पर्य ऐसी योजनाओं से है जिनका उद्देश्य एक-से-अधिक समस्याओं का समाधान करना होता है। इसीलिए इन्हें बहुध्येयी योजनाएँ कहा जाता है। स्वतन्त्रता-प्राप्ति के पश्चात् देश में खाद्यान्न एवं औद्योगिक उत्पादन में क्रान्तिकारी परिवर्तन के लिए इन योजनाओं को आरम्भ किया गया था। इन योजनाओं का प्रारूप संयुक्त राज्य अमेरिका की ‘टेनेसी नदी-घाटी योजना के आधार पर तैयार किया गया है। भारत में बहु-उद्देशीय नदी-घाटी परियोजनाएँ मुख्य रूप से दो प्रकार की होती हैं—(क) सिंचाई परियोजनाएँ तथा (ख) जल-विद्युत परियोजनाएँ।

उद्देश्य (कार्य)-बहु-उद्देशीय नदी-घाटी परियोजनाओं के प्रमुख उद्देश्य (कार्य) निम्नलिखित हैं

  • जल-विद्युत शक्ति का उत्पादन करना।
  • बाढ़ों पर नियन्त्रण करना।
  • सिंचाई हेतु नहरों का निर्माण एवं विकास करना।
  • मत्स्य-पालन करना।
  • भू-क्षरण पर प्रभावी नियन्त्रण करना।
  • उद्योग- धन्धों का विकास करना।
  • आन्तरिक जल-परिवहन का विकास करना।
  • दलदली भूमियों को सुखाना।
  • शुद्ध पेयजल की व्यवस्था करना।
  • प्राकृतिक सौन्दर्य तथा मनोरंजन व पर्यटन स्थलों का विकास करना।
  • क्षेत्रीय नियोजन तथा उपलब्ध संसाधनों का पूर्ण और समुचित उपयोग करना।
  • पशुओं के लिए हरे चारे की व्यवस्था करना।

देश के आर्थिक विकास में योगदान (महत्त्व)/लाभ

बहु-उद्देशीय परियोजनाओं के अन्तर्गत देश की सर्वांगीण उन्नति एवं विकास में उपयोगी होने के कारण सभी प्रमुख तथा महत्त्वपूर्ण नदियों पर बाँध बनाये गये हैं तथा जल का उपयोग एक साथ कई उद्देश्यों की पूर्ति के लिए किया जाने लगा है। इन परियोजनाओं से जो लाभ उठाये जा रहे हैं, उनका विवरण अग्रलिखित है–

1. सिंचाई- नदियों पर बाँध बनाकर उसके पीछे जलाशय में जल संचित कर लिया जाता है। इससे शुष्क ऋतु में सिंचाई के लिए जल प्राप्त होता है। राजस्थान में सतलुज नदी के जल का प्रयोग सिंचाई के लिए किया जाता है। सिंचाई सुविधाओं के विकास एवं विस्तार से कृषि-योग्य क्षेत्रफल तथा भूमि की उत्पादकता में वृद्धि हुई है तथा एक-फसली क्षेत्र बहु-फसली क्षेत्र में परिणत हो गये हैं।

2. बाढ़-नियन्त्रण- 
विनाशकारी बाढ़ों के लिए कुख्यात नदियों पर बाँध बनाकर इन परियोजनाओं से बाढ़-नियन्त्रण सम्भव हुआ है। अब दामोदर तथा कोसी नदियाँ ‘शोक की नदियाँ नहीं रहीं। अब वे आर्थिक विकास के लिए वरदान बन गयी हैं।


3. जल-विद्युत उत्पादन- 
नदियों पर बाँध बनाकर उनके जल को ऊँचाई से गिराकर बड़ी-बड़ी टर्बाइनों की सहायता से जल-विद्युत का उत्पादन किया जाता है। जलविद्युत जीवाश्म ईंधनों से उत्पन्न तापीय ऊर्जा की अपेक्षा प्रदूषणरहित, स्वच्छ और सतत शक्ति का साधन होती है।

4. वन-रोपण- 
नदी-घाटी में वन-रोपण किया जाता है। इससे पारिस्थितिकी का सन्तुलन कायम होता है। वन-भूमि में वन्य-जीवों को निरापद आश्रय-स्थल प्राप्त होता है। वन क्षेत्रों में उगी हरी-भरी घासे पशुपालन को प्रोत्साहित करती हैं।

5. नौकारोहण- 
बाँध से निकाली गयी नहरों में नौ-परिवहन की सुविधाएँ प्राप्त होती हैं, जो यातायात का सबसे सस्ता साधन हैं।

6. मत्स्यपालन- 
जलाशयों तथा नहरों में मछलियाँ पाली जाती हैं, उनके बीज तैयार किये जाते हैं और उनकी बिक्री से आर्थिक लाभ कमाया जाता है।

7. मृदा-संरक्षण- 
मिट्टी का अपरदन नियन्त्रित होता है तथा उसका संरक्षण सम्भव होता है।


8. पर्यटन और मनोरंजन- 
ये परियोजनाएँ पर्यटकों के लिए आकर्षण का केन्द्र होती हैं; क्योंकि खाली ‘ पड़ी भूमि पर सुन्दर पार्क, उद्यान आदि का विकास किया जाता है, जो इसके प्राकृतिक सौन्दर्य में वृद्धि कर देते हैं।

9. उद्योग-धन्धों का विकास- 
उद्योग-धन्धों का विकास सस्ती ऊर्जा-शक्ति की उपलब्धता पर निर्भर करता है। बहुध्येयी परियोजनाओं के विकास से उद्योगों को सस्ती जलविद्युत शक्ति के साथ-साथ स्वच्छ जल भी उपलब्ध हो जाता है।

यद्यपि बहु-उद्देशीय परियोजना के प्रमुख उद्देश्य सिंचाई, जल-विद्युत उत्पादन तथा बाढ़-नियन्त्रण हैं, तथापि इनसे अन्य लाभ भी प्राप्त होते हैं। जब एक बहु-उद्देशीय परियोजना स्थापित की जाती है तो उसके द्वारा सेवित सम्पूर्ण क्षेत्र का समग्र विकास होता है। उदाहरण के लिए-दामोदर घाटी परियोजना से झारखण्ड तथा प० बंगाल राज्यों को सिंचाई, जलविद्युत, बाढ़-नियन्त्रण, मत्स्य-पालन, मृदा-संरक्षण, वन-रोपण, नौका-रोहण आदि के लाभ प्राप्त होते हैं। जल विद्युत के उत्पादन से उद्योगों को भी लाभ पहुँचता है। औद्योगिक विकास से नगरीकरण में वृद्धि होती है तथा सम्पूर्ण क्षेत्र का आर्थिक विकास होता है। दामोदर घाटी परियोजना के कारण सम्पूर्ण दामोदर घाटी क्षेत्र देश का महत्त्वपूर्ण औद्योगिक क्षेत्र बन सका है। देश में स्थापित अन्य परियोजनाओं से भी देश के विभिन्न क्षेत्रों का आर्थिक विकास सम्भव हुआ है।

प्रश्न 2.
भाखड़ा-नांगल बहु-उद्देशीय नदी-घाटी परियोजना का विवरण दीजिए तथा उससे होने वाले लाभ भी लिखिए।
या
भारत की किसी एक बहु-उद्देशीय नदी-घाटी परियोजना का वर्णन निम्नलिखित शीर्षकों के अन्तर्गत कीजिए [2010]
(क) स्थिति, (ख) महत्त्व।
उत्तर :

भाखड़ा-नांगल बहुउद्देशीय नदी-घाटी परियोजना

UP Board Solutions for Class 10 Social Science Chapter 5 (Section 3)
UP Board Solutions for Class 10 Social Science Chapter 5 (Section 3)

स्थिति- यह भारत की सबसे बड़ी बहु-उद्देशीय नदी-घाटी परियोजना है। इस परियोजना के अन्तर्गत सन् 1963 में पंजाब के रोपड़ नामक स्थान से 80 किमी ऊपर उत्तर की ओर, जहाँ सतलुज नदी शिवालिक श्रेणियों को काटकर सँकरी घाटी में प्रवाहित होती है, ‘भाखड़ा’ नामक गाँव के निकट एक विशाल बाँध बनाया गया है। इस बाँध के कारण नदी का जल एक विशाल जलाशय के रूप में परिवर्तित हो गया है। इस परियोजना में है 235 करोड़ का व्यय हुआ था। भाखड़ा बाँध सतलुज नदी के आर-पार 518 मीटर लम्बा तथा 226 मीटर ऊँचा है। ऊँचाई की दृष्टि से इस बाँध का विश्व में दूसरा स्थान है। जल संसाधन 305 इस बाँध में सतलुज नदी का जल एक कृत्रिम जलाशय के रूप में एकत्र किया गया है। यह कृत्रिम जलाशय ‘गोविन्द सागर’ कहलाता है, जो 80 किमी लम्बा तथा 3-4 किमी चौड़ा है। इसमें 114 करोड़ घन मीटर जल संगृहीत किया जा सकता है। भाखड़ा से 13 किमी नीचे ‘नांगल’ नामक स्थान पर दूसरा बाँध बनाया गया है, जो 29मीटर ऊँचा, 315 मीटर लम्बा तथा 121 मीटर चौड़ा है। इस बाँध से नहरें भी निकाली गयी हैं।
उपयोगिता/प्रमुख लाभ/उपलब्धियाँ/महत्त्व- इस परियोजना के अन्तर्गत तीन शक्तिगृह बनाये गये हैं, जिनसे 1,204 मेगावाट जलविद्युत शक्ति उत्पन्न की जाती है। भाखड़ा बाँध से 1,100 किमी लम्बी मुख्य नहरें निकाली गयी हैं। इसकी उपशाखाओं सहित कुल लम्बाई 4,370 किमी है। इन नहरों से 27 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई की जाती है। इस परियोजना से निकाली गयी नहरों द्वारा की गयी सिंचाई ने उत्तर-पश्चिमी भारत की कृषि अर्थव्यवस्था में उत्तरोत्तर लाभ एवं वृद्धि का मार्ग प्रशस्त किया है तथा यह एक समृद्धिशाली कृषि क्षेत्र के रूप में विकसित हुआ है। पंजाब, हरियाणा एवं राजस्थान राज्यों की कृषि भूमि को सिंचाई का पूरा-पूरा लाभ इस परियोजना ने पहुंचाया है। इन नहरों से ही राजस्थान की सूखी तथा प्यासी धरती में हरियाली की लहर आ गयी है और खाद्यान्नों को पर्याप्त उत्पादन होने लगा है। इस परियोजना से उत्पन्न जलविद्युत ने पंजाब, हरियाणा, दिल्ली तथा राजस्थान में उद्योग-धन्धों की स्थापना और कृषि के विकास में बहुत सहयोग दिया है। भाखड़ा-नांगल परियोजना ने इन राज्यों में आर्थिक और सांस्कृतिक प्रगति के द्वार खोल दिये हैं। इस प्रकार यह परियोजना भारत की बहुमुखी प्रगति की द्योतक है।

प्रश्न 3.
बहु-उद्देशीय नदी-घाटी योजना सिंचाई के पारम्परिक साधनों से किस प्रकार अच्छी है ? भारत के विभिन्न क्षेत्रों से उदाहरण दीजिए।
उत्तर :
सिंचाई के पारम्परिक साधन नहरें, कुएँ, नलकूप और तालाब हैं। देश में सिंचाई के विकास के लिए अनेक सिंचाई परियोजनाएँ विकसित की गयी हैं, जिनसे बड़ी, मध्यम तथा लघु योजनाएँ मुख्य हैं। सिंचाई की बड़ी तथा मध्यम परियोजनाओं के अन्तर्गत देश की अनेक नदियों से नहरें निकाली गयी हैं। पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान आदि उत्तरी राज्यों को इनसे सिंचाई की सुविधा सुलभ हुई है। दक्षिणी भारत में भी महानदी, गोदावरी, कृष्णा तथा कावेरी नदियों से डेल्टाई क्षेत्रों में नहरें निकालकर
ओडिशा, आन्ध्र प्रदेश तथा तमिलनाडु राज्यों में सिंचाई की व्यवस्था की गयी है, किन्तु सिंचाई के लिए पारम्परिक नहरी सिंचाई परियोजनाओं की अपेक्षा बहु-उद्देशीय नदी-घाटी परियोजनाएँ अधिक श्रेष्ठ हैं, क्योंकि इनसे नहरी सिंचाई के अतिरिक्त निम्नलिखित अनेक लाभ प्राप्त होते हैं

1. बाढ़-नियन्त्रण एवं मृदा-संरक्षण- 
नदियों पर बाँध बनाकर जल-प्रवाह की तीव्रता को नियन्त्रित कर लिया जाता है, जिससे मृदा का संरक्षण होने के साथ-साथ बाढ़-नियन्त्रण भी सम्भव होता है।

2. सिंचाई सुविधाओं का विस्तार- 
नदियों पर बाँधों के पीछे बड़ी-बड़ी झीलें बनायी जाती हैं, जिनमें वर्षा का जल एकत्र हो जाता है। इस जल का प्रयोग शुष्क ऋतु में नहरों द्वारा सिंचाई के लिए किया जाता है।

3. जल-विद्युत का उत्पादन- 
बाँधों द्वारा संचित किये गये जल को ऊँचाई से गिराया जाता है, जिससे जल-विद्युत का उत्पादन होता है। जल-विद्युत ऊर्जा प्राप्ति का स्वच्छ एवं प्रदूषण मुक्त साधन है।

4. औद्योगिक विकास- 
इन परियोजनाओं से उद्योगों को सस्ती जल-विद्युत प्राप्त हो जाती है, साथ ही आवश्यक जल की आपूर्ति भी बनी रहती है।

5. जल-परिवहन सुविधा- 
इन परियोजनाओं के अन्तर्गत नदियों तथा नहरों में अन्त:स्थलीय जल-परिवहन की सुविधा भी सुलभ हो जाती है। भारी वस्तुओं के परिवहन के लिए यह सबसे सस्ता साधन है।

6. मत्स्य उद्योग का विकास- 
बाँधों के पीछे बने जलाशयों में मछलियों के बीज तैयार किये जाते हैं। तथा कुछ विशेष किस्म की मछलियों को भी पाला जाता है।

7. वन्य भूमि का विस्तार- 
बाँधों के जलग्रहण क्षेत्र में योजनाबद्ध तरीके से वृक्षारोपण किया जाता है, जिससे न केवल वन्य क्षेत्र का विस्तार होता है, वरन् मृदा अपरदन पर भी रोक लगती है।

8. सूखा-अकाल से मुक्ति- 
भारतीय जलवायु की मानसूनी प्रवृत्ति के कारण अतिवृष्टि एवं अनावृष्टि होने से अकाल पड़ना सामान्य बात है। बहु-उद्देशीय परियोजनाओं के अन्तर्गत जलमग्न क्षेत्रों के अतिरिक्त जल को सूखाग्रस्त क्षेत्रों में भेजकर अकाल की स्थिति से बचने का प्रयास किया जा सकता है।

प्रश्न 4.
बहु-उद्देशीय नदी घाटी परियोजना से क्या तात्पर्य है ? रिहन्द बाँध परियोजना का संक्षिप्त परिचय दीजिए।
या
रिहन्द बाँध परियोजना का वर्णन निम्नलिखित शीर्षकों में कीजिए [2014]
(a) स्थिति, (ii) प्रभावित क्षेत्र, (iii) महत्त्व।
या
रिहन्द बाँध परियोजना का निर्माण किस नदी पर हुआ है ? इससे किन राज्यों को लाभ पहुँचा है ?
उत्तर :
[संकेत-बहु-उद्देशीय परियोजना से तात्पर्य के लिए विस्तृत उत्तरीय प्रश्न संख्या 1 का आरम्भिक भाग देखें।

रिहन्द बाँध योजना

उत्तर प्रदेश राज्य का गौरव कही जाने वाली इस बहु-उद्देशीय परियोजना को ‘गोविन्द वल्लभ सागर परियोजना’ के नाम से भी जाना जाता है। यह इस राज्य की एकमात्र सबसे बड़ी तथा महत्त्वपूर्ण परियोजना है। इस परियोजना का निर्माण सोन नदी की सहायक रिहन्द नदी पर मिर्जापुर जिले से 161 किमी दक्षिण में मिर्जापुर जनपद के पिपरी नामक स्थान पर किया गया है। यह बाँध 930 मीटर लम्बा, 70 मीटर चौड़ा तथा 92 मीटर ऊँचा है। इस बाँध के पीछे की ओर गोविन्द वल्लभ सागर नामक विशाल जलाशय का निर्माण किया गया है। इसका क्षेत्रफल 300 वर्ग किमी है। यह मानव द्वारा निर्मित सबसे बड़ी झील है, जिसका प्रमुख उद्देश्य रिहन्द नदी की बाढ़ों पर नियन्त्रण करना है। इसे ‘रेणुका बहु-उद्देशीय परियोजना’ के नाम से भी जाना जाता है।

इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य रिहन्द नदी की भयंकर बाढ़ों पर नियन्त्रण पाना है। बाँध के नीचे की ओर ओबरा नामक स्थान पर छ: टरबाइन युक्त एक विशाल शक्ति-गृह बनाया गया है, जिससे 300 मेगावाट शक्ति तैयार की जा रही है। इससे 600 किमी लम्बी नहरें निकाली गयी हैं, जिनसे पूर्वी उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ तथा पश्चिमी बिहार में सिंचाई की सुविधाएँ प्रदान की जा रही हैं। गोविन्द वल्लभ पन्त सागर के जल को सोन नदी में डालकर सोन नहर-प्रणाली के माध्यम से बिहार के चम्पारन, दरभंगा, मुजफ्फरपुर
आदि जिलों में भी 2.5 लाख हेक्टेयर भूमि पर सिंचाई की सुविधाएँ प्रदान की गयी हैं।

यह एक जल-विद्युत शक्ति उत्पादन परियोजना है, जिसके विद्युत शक्ति-गृहों से 3 लाख किलोवाट विद्युत शक्ति उत्पादित की जा रही है। इस शक्ति का उपयोग नलकूप चलाने में किया जाता है तथा मुगलसराय एवं गया के बीच रेलगाड़ियों का संचालन किया जाता है। इस परियोजना से निकाली गयी नहरों से 22 लाख हेक्टेयर तथा नलकूपों द्वारा 34 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई की जा रही है। फलस्वरूप सम्बन्धित क्षेत्रों में खाद्यान्नों एवं अन्य कृषि उत्पादों में पर्याप्त वृद्धि हुई है। इस परियोजना द्वारा अनेक नवीन उद्योगों की स्थापना

करने में सहायता मिली है। मिर्जापुर-सोनभद्र में ऐलुमिनियम, रसायन एवं सीमेण्ट उद्योग तथा मध्य प्रदेश के रीवा जिले में सीमेण्ट, सूती वस्त्र, ऐलुमिनियम, काँच, रासायनिक उर्वरक तथा चीनी बनाने के कारखाने स्थापित किये गये हैं। सोन नदी-घाटी को नहरों द्वारा गंगा नदी से जोड़कर जल-यातायात की सुविधाएँ भी विकसित की जा रही हैं। इस परियोजना की अन्य उपलब्धियों में बाढ़-नियन्त्रण, वृक्षारोपण, मत्स्यपालन, भू-संरक्षण, खनिजों का अधिकाधिक उपयोग तथा मनोरंजन एवं भ्रमण-केन्द्रों का विकास करना है। इस प्रकार कहा जा सकता है कि पूर्वी उत्तर प्रदेश, पश्चिमी बिहार तथा पूर्वी मध्य प्रदेश के समग्र विकास में रिहन्द परियोजना मील का पत्थर सिद्ध हुई है।

प्रश्न 5.
बहु-उद्देशीय नदी घाटी परियोजना से आप क्या समझते हैं ? दामोदर घाटी परियोजना का
वर्णन निम्नलिखित शीर्षकों के अन्तर्गत दीजिए—(क) स्थिति, (ख) उपलब्धियाँ। [2013]
या
दामोदर नदी-घाटी परियोजना की स्थिति पर प्रकाश डालिए। इससे होने वाले किन्हीं चार लाभों की विवेचना कीजिए। [2013]
या

दामोदर घाटी परियोजना की स्थिति एवं महत्त्वों का वर्णन कीजिए। [2013]
या

दामोदर घाटी परियोजना के तीन महत्त्वों पर प्रकाश डालिए। [2015, 16]
उत्तर :
(संकेत-बहु-उद्देशीय नदी घाटी परियोजना से तात्पर्य’ के लिए विस्तृत उत्तरीय प्रश्न संख्या 1 का आरम्भिक भाग देखिए।

दामोदर घाटी परियोजना

स्थिति- दामोदर (हुगली की सहायक नदी) नदी का उद्गम स्रोत छोटा नागपुर की पहाड़ियाँ हैं, जो 610 मीटर ऊँची हैं। इस नदी की लम्बाई 530 किमी है, जो झारखण्ड में 290 किमी बहने के उपरान्त पश्चिम बंगाल राज्य में 240 किमी बहकर हुगली नदी से मिल जाती है। इसकी ऊपरी घाटी में वर्षा ऋतु में अत्यधिक वर्षा होने से भयंकर बाढ़े आती हैं, जो नदी के किनारों की मिट्टी काटकर बहा ले जाती हैं। इससे करोड़ों रुपये की हानि उठानी पड़ती है। दामोदर नदी अपनी भयंकर बाढ़ों के लिए कुख्यात थी। इसकी बाढ़ से लगभग 18,000 वर्ग किमी भूमि प्रभावित होती थी। इसी कारण इस नदी को ‘बंगाल का शोक’ कहा जाता था।

सन् 1948 ई० में भारत सरकार ने दामोदर घाटी के सर्वांगीण विकास हेतु दामोदर घाटी निगम (Damodar Valley Corporation) की स्थापना की। इस निगम का मुख्य उद्देश्य दामोदर घाटी का आर्थिक विकास करना तथा सिंचाई, जल-विद्युत की सुविधाओं में वृद्धि कर बाढ़ों पर नियन्त्रण पानी एवं अन्य उद्देश्यों को पूर्ण करना है, जिससे इस प्रदेश का बहुमुखी आर्थिक विकास हो सके।

दामोदर घाटी परियोजना के अन्तर्गत आठ बाँध एवं एक बड़े अवरोधक को बनाया गया है। दामोदर नदी पर पंचेत पहाड़ी, अय्यर एवं बम बाँध; बाराकर नदी पर मैथान, बाल पहाड़ी एवं तिलैया बाँध; बोकारो नदी पर बोकारो बाँध तथा कोनार नदी पर कोनार बाँध बनाये जाने प्रस्तावित हैं, जिनमें चार बाँध–तिलैया, कोनार, पंचेत पहाड़ी तथा मैथान बन चुके हैं। एक बड़ा अवरोधक दुर्गापुर के समीप निर्मित किया गया है, जिसमें लगभग 2,500 किमी लम्बी नहरें एवं उनकी शाखाएँ निकाली गयी हैं। इन बाँधों से बाढ़ का जल रोका गया है तथा सभी बाँधों से जलविद्युत शक्ति का उत्पादन किया जा रहा है। यह योजना केन्द्रीय सरकार, बिहार एवं पश्चिम बंगाल राज्य सरकारों के सहयोग से क्रियान्वित की गयी है। यह विश्व की दूसरी सबसे बड़ी परियोजना है।

उपयोगिता/प्रमुख लाभ/उपलब्धियाँ/महत्त्व- इस परियोजना से दामोदर एवं उसकी सहायक नदियों में आने वाली बाढ़ों पर नियन्त्रण हुआ है। लगभग 74 लाख हेक्टेयर भूमि पर नित्यवाही सिंचाई की जा रही है, जिससे अतिरिक्त जूट एवं खाद्यान्नों का उत्पादन हो रहा है। कोलकाता एवं पश्चिम बंगाल के कोयला क्षेत्रों के बीच 145 किमी लम्बा एक नाव्य जलमार्ग का निर्माण हुआ है। बाँधों में नावें चलाने, तैरने एवं मत्स्य की सुविधाएँ हैं। घरेलू कार्यों के लिए शुद्ध जल की प्राप्ति के साथ-साथ लगभग 1,120 वर्ग किमी क्षेत्र में पेयजल की समस्या का निराकरण हुआ है। छोटा नागपुर के उजाड़ पठारी क्षेत्रों में भू-अपरदन को रोकने के लिए वृक्षारोपण, पशुओं के लिए चारा, रेशम के कीड़ों के लिए शहतूत के वृक्ष तथा उद्योगों के लिए लाख एवं बाँस की उपलब्धि हुई है। लगभग 3 लाख किलोवाट जलविद्युत शक्ति का उत्पादन किया जा रहा है, जिससे झारखण्ड, कोलकाता, पटना, जमशेदपुर, डालमिया नगर आदि शहरों के औद्योगीकरण में तीव्रता आयी है।

दामोदर पाटी निगम से पश्चिम बंगाल में बर्दवान, हावड़ा, हुगली एवं बांकुड़ा जिलों में 4.40 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई की जा रही है। इस परियोजना के द्वितीय चरण में बम, अय्यर, बोकारो एवं बाल पहाड़ी स्थानों पर जलविद्युत शक्ति के लिए बाँध बनाये जाने की योजना है।

इस प्रकार दामोदर घाटी परियोजना पश्चिम बंगाल तथा झारखण्ड राज्यों के विशाल क्षेत्र में आर्थिक तथा औद्योगिक विकास में सहायक सिद्ध हुई है। यहाँ कृषि, उद्योग, वाणिज्य, व्यापार तथा परिवहन के साधनों में क्रान्तिकारी परिवर्तन होने से आर्थिक परिवेश बदल गया है तथा इस क्षेत्र की खनिज सम्पदा का भरपूर दोहन सम्भव हुआ है। इससे इस प्रदेश में प्रगति और विकास की लहर दौड़ गयी है। इस प्रकार यह परियोजना झारखण्ड तथा पश्चिम बंगाल राज्यों के सर्वांगीण विकास हेतु वरदान सिद्ध हुई है।

लघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
देश के विकास में तुंगभद्रा परियोजना का महत्त्व लिखिए।
उत्तर :
तुंगभद्रा परियोजना आन्ध्र प्रदेश और कर्नाटक राज्यों की संयुक्त परियोजना है। कृष्णा की सहायक तुंगभद्रा नदी पर 50 मीटर ऊँचा तथा 2.5 किलोमीटर लम्बा बाँध कर्नाटक के बेल्लारी जनपद के मल्लापुरम् नामक स्थान पर बनाया गया है। इससे आन्ध्र प्रदेश और कर्नाटक राज्यों की लगभग चार लाख हेक्टेयर भूमि पर सिंचाई की सुविधाएँ प्राप्त हैं। इसकी विद्युत उत्पादन क्षमता 126 मेगावाट है, जिससे दोनों राज्यों के उद्योगों को विद्युत प्राप्त होती है। इस योजना से मत्स्यपालन का भी विकास हुआ है।

प्रश्न 2.
इन्दिरा गांधी नहर परियोजना पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर :
‘इन्दिरा गांधी नहर परियोजना’ पहले राजस्थान नहर परियोजना के नाम से जानी जाती थी। यह विश्व की विशालतम नहर परियोजना है। यह नहर पंजाब में सतलुज एवं व्यास नदियों के संगम पर स्थित हरिके बॉध से निकाली गयी है। हरिके बाँध से रामगढ़ तक इस नहर की कुल लम्बाई 649 किमी है। बाँध के पीछे निर्मित जलाशय में 6,90,000 हेक्टेयर मीटर जल एकत्र हो सकती है। इससे व्यास नदी के जल को सतलुज नदी में लाने में सहायता प्राप्त हुई है। इसी जल को पश्चिमी राजस्थान नहर में ले जाया जाता है। इसके द्वारा उत्तर-पश्चिमी राजस्थान, गंगानगर, बीकानेर, बाड़मेर तथा जैसलमेर जिलों में सिंचाई की जाती है। यह नहर पंजाब, हरियाणा व राजस्थान के 14.5 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई करती है। इन सुविधाओं के कारण राजस्थान का शुष्क मरुस्थलीय भाग पंजाब और हरियाणा की भाँति ‘अन्न का भण्डार’ बन सकेगा। अनेक कृषि तथा पशु-आधारित उद्योगों की भी स्थापना होगी।

प्रश्न 3.
जल एवं भूमि संसाधन के अन्तर को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :
जल संसाधन- 
स्वच्छ जल मनुष्य की दैनिक आधारभूत आवश्यकताओं में से एक है। घरेलू कार्यों में पानी की आवश्यकता केवल पीने के लिए ही नहीं, अपितु खाना बनाने, कपड़े धोने, स्नान करने
आदि कार्यों के लिए भी पड़ती है। देश की कृषि का विकास भी जलं की सुलभता पर ही निर्भर करता है। जल द्वारा विद्युत का उत्पादन किया जाता है। नहरों व नदियों में नाव, स्टीमर आदि चलाना जल परिवहन का भी साधन है। समुद्रों में जहाजों द्वारा लम्बी-लम्बी यात्राएँ की जाती हैं तथा इनके द्वारा वस्तुओं का आयात-निर्यात किया जाता है। उद्योगों में भी जल की उत्पादन कार्य में सहायता लेनी पड़ती है।

भूमि संसाधन- किसी देश या प्रदेश के अन्तर्गत सम्मिलित भूमि को भूमि संसाधन कहते हैं। इसके अन्तर्गत कृषि भूमि, चरागाह भूमि, पोकर भूमि, वन भूमि, बंजर भूमि, परती भूमि आदि सम्मिलित की जाती हैं। मनुष्य इस उपलब्ध भूमि पर विविध प्रकार से क्रिया-कलाप करता है। कृषि, पशुपालन, वनोद्योग, खनन-निर्माण उद्योग, परिवहन व्यापार, संचार आदि सभी का सम्बन्ध भूमि संसाधन से होता है। इस प्रकार भूमि संसाधन जल संसाधनों को आधार प्रदान करते हैं, जिनका उपयोग मनुष्य अपने क्रियाकलापों की आपूर्ति में करता है।

प्रश्न 4.
उत्तरी भारत की दो नदियों के नाम लिखिए। [2009]
उत्तर :
उत्तरी भारत की दो प्रमुख नदियों के नाम गंगा और यमुना हैं। उत्तरी भारत की नदियाँ हिमालय पर्वत के हिमाच्छादित शिखरों से निकलती हैं, जिनमें वर्षभर पर्याप्त जल बहता रहता है, ये नदियाँ लम्बी हैं। तथा उनके प्रवाह क्षेत्र अधिक बड़े हैं। उत्तर भारत की नदियाँ समतल व उर्वर भागों से होकर बहती हैं, इसलिए उनका जल नहरों द्वारा सिंचाई कार्य में प्रयुक्त किया जाता है। उत्तरी भारत की प्रमुख नहरें ऊपरी गंगा नहर, पूर्वी यमुना नहर तथा शारदा नहर हैं।

प्रश्न 5.
जल की माँग किन-किन कार्यों में की जाती है ? [2009]
या
जल संसाधनों से क्या अभिप्राय है ? भारत के लिए इनका क्या महत्त्व है ?
उत्तर :
वर्षा के जल का कुछ भाग भाप बनकर वायुमण्डल में मिल जाता है, कुछ जल भूमि सोख लेती है; जिसे भूमिगत जल कहते हैं। शेष जल ढालू सतह से बहकर आगे बढ़ता रहता है, जिसे बहता हुआ जल (नदी या सरिता) कहते हैं। इस प्रकार भू-पृष्ठ के ऊपर तथा भू-गर्भ में मिलने वाले समस्त जल को जल संसाधन कहा जाता है।

भारत एक कृषिप्रधान देश है जिसकी वर्तमान आबादी 121 करोड़ है। यहाँ जल का प्रमुख उपयोग सिंचाई के लिए किया जाता है। सिंचाई के द्वारा देश के कृषि-क्षेत्र में न केवल वृद्धि हुई है, वरन् भूमि की उत्पादकता में भी सुधार हुआ है। इससे खाद्यान्नों के उत्पादन हेतु अत्यधिक मात्रा में जल की पूर्ति होती है। जल का दूसरा उपयोग पेयजल के रूप में किया जाता है। जल परिवहन का भी एक साधन है। उद्योगों में भी जल की आवश्यकता पड़ती है। इस प्रकार मानवीय जीवन में जल की महिमा अपरम्पार है। इसीलिए कहा जाता है कि जहाँ जल है वहीं जीवन है।

प्रश्न 6.
भारत में जलसंकट के समाधान हेतु दो सुझाव दीजिए।
उत्तर :
फसलों में सिंचाई, नगरीय एवं औद्योगिक कार्यों में बढ़ते उपयोग के कारण देश में ताजे जल की कमी बढ़ती जा रही है। यदि समय रहते इस पर ध्यान न दिया गया तो भविष्य में यह संकट घातक रूप ग्रहण कर सकता है। इसके लिए उपलब्ध जल संसाधनों के वैज्ञानिक उपयोग के साथ-साथ उनके संरक्षण की आवश्यकता है। इसमें जहाँ एक तरफ वर्षा के जल को संग्रहीत करने पर जोर दिया जा रहा है वहीं दूसरी तरफ जल की बरबादी को रोकने, उसके अन्धाधुन्ध उपयोग पर अंकुश लगाने तथा उसे प्रदूषण मुक्त रखने के प्रयास किये जा रहे हैं। राजस्थान के जलाभाव वाले क्षेत्रों में तो प्राचीन काल से ही वर्षा के जल को भूमिगत टैंकों में संग्रह करने की परम्परा थी। तमिलनाडु में हाल ही में इसे अनिवार्य कर दिया गया है। नरेगी के अन्तर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में पुराने तालाबों का जीर्णोद्धार और नए तालाब का निर्माण, वर्षा जल संग्रह का एक प्रयास है। सिंचाई में जल के उपयोग को कम करने के लिए ‘ड्रिप सिंचाई’, ‘शुष्क कृषि’ आदि को लोकप्रिय बनाने का प्रयास किया जा रहा है। हाल में, सरकार देश की सभी बड़ी नदियों को जोड़ने की एक महत्त्वपूर्ण परियोजना पर भी विचार कर रही है।

प्रश्न 7.
प्रदूषित जल से हमारे स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर :
जल-प्रदूषण का मानव के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। प्रदूषित जल से मानव में हैजा, टाइफॉइड, पेचिस व पोलियो जैसे घातक रोग होते हैं, जो बाद में महामारी का रूप धारण कर लेते हैं। इससे मानव का स्वास्थ्य तो खराब होता ही है, अनेक लोगों की मृत्यु भी हो जाती है।

प्रश्न 8.
जल प्रबंधन से क्या आशय है? इसके दो महत्त्व लिखिए। [2014]
उत्तर :
जल-प्रबंधन- 
पृथ्वी पर उपलब्ध जल-संसाधन का समझदारी एवं विवेकपूर्वक व्यय करना तथा उसका संरक्षण करना जल-प्रबंधन कहलाता है। महत्त्व-जल-प्रबंधन के दो महत्त्व निम्नवत् हैं

  • जल प्रबंधन के द्वारा उन क्षेत्रों को जल उपलब्ध कराया जा सकता है जहाँ पेयजल की कमी हो।
  • उचित जल-प्रबंधन द्वारा अर्थात् जल का विवेकपूर्ण व्यय करके उसे भविष्य के लिए संचित किया जा सकता है।

प्रश्न 9.
नागार्जुन सागर परियोजना की उपयोगिता पर प्रकाश डालिए।
उत्तर :

नागार्जुन सागर परियोजना

नागार्जुन सागर परियोजना के अन्तर्गत आन्ध्र प्रदेश में कृष्णा नदी पर नन्दीकोण्डा गाँव के निकट 88 मीटर ऊँचा तथा 1,450 मीटर लम्बा बाँध बनाया गया है। इससे आन्ध्र प्रदेश की 8.67 लाख हेक्टेयर भूमि पर सिंचाई की सुविधाएँ मिली हैं। जल-विद्युत द्वारा अनेक उद्योगों का विकास हुआ है तथा मत्स्यपालन में वृद्धि हुई है। इस परियोजना का नामकरण बौद्ध विद्वान नागार्जुन के नाम पर किया गया है। इस परियोजना में बनाये गये बाँध के पीछे, जहाँ आज एक कृत्रिम जलाशय है, पहले अत्यन्त सुन्दर वास्तुकला के प्राचीन मन्दिर थे। यदि इन मन्दिरों को वहाँ से न हटाया गया होता तो वे जल में डूब गये होते। इसलिए इन मन्दिरों के प्रत्येक पत्थर को हटाकर नये स्थानों पर ले जाया गया, फिर उन्हीं पत्थरों से बिल्कुल पहले जैसे ही मन्दिरों का निर्माण कर दिया गया। यह परियोजना इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि हम आधुनिक प्रौद्योगिकी को अपनाकर ही अपनी धार्मिक-सांस्कृतिक धरोहर को सुरक्षित रख सकते हैं।

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न

प्रश्न 1.
प्राकृतिक संसाधन को परिभाषित कीजिए।
उत्तर :
जो पदार्थ मनुष्य को प्रकृति द्वारा निःशुल्क प्राप्त होते हैं, उन्हें प्राकृतिक संसाधन कहा जाता है; जैसे-मिट्टी, वायु, जल, वनस्पति आदि।

प्रश्न 2.
भाखड़ा-नांगल परियोजना किन राज्यों का संयुक्त प्रयास है ?
उत्तर :
भाखड़ा-नांगल परियोजना पंजाब, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा तथा राजस्थान राज्यों का संयुक्त प्रयास है।

प्रश्न 3.
भाखड़ा बाँध के पीछे मानव-निर्मित झील का नाम लिखिए। इसमें कितना जल एकत्रित होता है?
उत्तर :
भाखड़ा बाँध के पीछे मानव-निर्मित झील का नाम ‘गोविन्द सागर जलाशय’ है। इसमें 7.8 लाख हेक्टेयर मीटर जल संचित होता है।

प्रश्न 4.
भाखड़ा बाँध किस नदी पर बनाया गया है ?
उत्तर :
भाखड़ा बाँध सतलुज नदी पर बनाया गया है।

प्रश्न 5.
बहु-उद्देशीय परियोजनाओं के तीन प्रमुख उद्देश्य क्या हैं ?
उत्तर :
बहुउद्देशीय परियोजनाओं के तीन प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं

  • जल-विद्युत शक्ति का उत्पादन करना।
  • बाढ़ों पर नियन्त्रण करना।
  • सिंचाई हेतु नहरों का निर्माण एवं विकास करना।

प्रश्न 6.
इन्दिरा गांधी नहर द्वारा किन क्षेत्रों को सिंचित किया जाता है ?
उत्तर :
इन्दिरा गांधी नहर द्वारा उत्तर-पश्चिमी राजस्थान के गंगानगर, बीकानेर, चुरु, बाड़मेर तथा जैसलमेर जिलों को सिंचित किया जाता है।

प्रश्न 7.
संसार का सबसे लम्बा बाँध कौन-सा है ? यह किस नदी पर बनाया गया है ?
उत्तर :
संसार का सबसे लम्बा बाँध हीराकुड बाँध है। यह ओडिशा राज्य की महानदी पर बनाया गया है।

प्रश्न 8.
भारत की दो नदियों के नाम बताइए जिन्हें शोक सरिता’ कहा जाता था।
उत्तर :
बंगाल की दामोदर नदी तथा बिहार की कोसी नदी ‘शोक सरिता’ कहलाती थीं।

प्रश्न 9.
नेपाल के सहयोग से भारत में कौन-सी परियोजना पूरी की गयी है ?
उत्तर :
बिहार की कोसी परियोजना’ नेपाल के सहयोग से पूरी की गयी है।

प्रश्न 10.
भारत का प्रथम जल-विद्युत केन्द्र कहाँ और कब स्थापित किया गया ?
उत्तर :
सन् 1902 ई० में कर्नाटक राज्य में कावेरी नदी पर शिवसमुद्रम् नामक स्थान पर भारत का प्रथम जल-विद्युत केन्द्र स्थापित किया गया।

प्रश्न 11.
हीराकुड परियोजना के दो प्रमुख उद्देश्य लिखिए।
उत्तर :

  • महानदी के जल को नियन्त्रित कर बहु-उपयोगी बनाने के उद्देश्य से इस परियोजना को क्रियान्वित किया गया।
  • इस परियोजना के अन्तर्गत चार विद्युत शक्ति-गृहों का निर्माण किया गया है, जिनसे 2.70 लाख किलोवाट जलविद्युत शक्ति का उत्पादन किया जा रहा है, जिससे उद्योग-धन्धों की स्थापना में सहायता मिली है।

प्रश्न 12.
महानदी को ‘उड़ीसा का शोक’ क्यों कहा जाता है?
उत्तर :
महानदी अपनी भयंकर बाढ़ों के लिए विख्यात रही है। यह नदी अपने हरे-भरे डेल्टा को प्रतिवर्ष अपनी उफनती हुई जलधाराओं से रौंद डालती थी। इसीलिए इसे ‘उड़ीसा का शोक’ कहा जाता है।

प्रश्न 13.
विश्व की सबसे लम्बी कृत्रिम नहर का नाम लिखिए।
उत्तर :
ग्राण्ड कैनल (चीन)।

प्रश्न 14.
भारत की किन्हीं दो नदी घाटी परियोजनाओं के नाम लिखिए। [2016]
उत्तर :

  • टिहरी बाँध परियोजना तथा
  • भाखड़ा नांगल बाँध परियोजना।

प्रश्न 15.
दक्षिण भारत में तालाबों द्वारा सिंचाई के महत्त्वपूर्ण होने के दो कारणों का उल्लेख कीजिए। [2011]
उत्तर :

  • दक्षिण भारत में अधिकांश तालाब पक्के हैं। ये उन्नत अवस्था में हैं।
  • इन तालाबों में वर्ष भर जल आपूरित रहता है।

प्रश्न 16.
दो जल संसाधनों का उल्लेख कीजिए। [2014]
उत्तर :
दो जल संसाधन निम्नवत् हैं- 1. नदियाँ, तालाब एवं झरने। 2. भूमिगत जल।

प्रश्न 17.
भारत की दो प्रमुख बहु-उद्देशीय नदी घाटी परियोजनाओं के नाम लिखिए। [2014]
उत्तर :

  • भाखड़ा-नांगल बाँध परियोजना।
  • रिहन्द बाँध परियोजना।

प्रश्न 18.
वर्षा जल संचयन से क्या तात्पर्य है? [2015]
उत्तर :
वर्षा जल संचयन विभिन्न उपयोगों के लिए वर्षा जल को रोकने और एकत्र करने की विधि है।

प्रश्न 19.
भारत के दो राज्यों के नाम बताइए जिनसे होकर दामोदर नदी बहती है। [2017]
उत्तर :
झारखण्ड और पश्चिम बंगाल।

बहुविकल्पीय प्रश्न

1. नागार्जुन परियोजना किस नदी से सम्बन्धित है? [2009, 10, 12]
या
नागार्जुन सागर परियोजना किस नदी पर स्थित है? [2015]
(क) कृष्णा
(ख) कावेरी
(ग) महानदी
(घ) गंगा

2. नागार्जुन परियोजना किस राज्य में स्थापित है?
(क) आन्ध्र प्रदेश
(ख) कर्नाटक
(ग) केरल
(घ) तमिलनाडु

3. मध्य प्रदेश राज्य की प्रमुख परियोजना कौन-सी है?
(क) रिहन्द
(ख) चम्बल
(ग) हीराकुड
(घ) दामोदर

4. निम्नलिखित में से उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी नदी घाटी परियोजना कौन-सी है? [2013]
(क) माताटीला
(ख) रामगंगा
(ग) रिहन्द
(घ) गंडक

5. हीराकुड बहु-उद्देशीय परियोजना किस राज्य में स्थित है?
(क) मध्य प्रदेश
(ख) बिहार
(ग) ओडिशा
(घ) पश्चिम बंगाल

6. भाखड़ा-नांगल बाँध किस नदी पर स्थित है? [2017]
(क) व्यास
(ख) महानदी
(ग) कोसी
(घ) सतलुज

7. हीराकुड बाँध किस नदी पर बनाया गया है? [2012, 18]
(क) रिहन्द
(ख) दामोदर
(ग) महानदी
(घ) कृष्णा

8. भारत की सबसे बड़ी बहु-उद्देशीय नदी-घाटी परियोजना कौन-सी है?
(क) रिहन्द
(ख) दामोदर
(ग) भाखड़ा-नांगल
(घ) तुंगभद्रा

9. निम्नलिखित में से कौन-सी परियोजना प० बंगाल और झारखण्ड को संयुक्त रूप से लाभान्वित करती है?
(क) तुंगभद्रा
(ख) टिहरी बाँध
(ग) दामोदर घाटी
(घ) नागार्जुन सागर

10. माताटीला बाँध किस जनपद में बनाया गया है? (2012]
(क) आगरा में
(ख) ललितपुर में
(ग) कानपुर में
(घ) मथुरा में

11. मध्य प्रदेश की सबसे लम्बी नदी है [2009]
(क) नर्मदा
(ख) ताप्ती
(ग) सोन
(घ) केन

12. रिहन्द बाँध परियोजना किस राज्य में स्थित है? [2015]
या
रिहन्द बाँध किस राज्य में बनाया गया है? [2016]
(क) आन्ध्र प्रदेश
(ख) मध्य प्रदेश
(ग) उत्तर प्रदेश
(घ) पश्चिम बंगाल

13. निम्नलिखित में से सबसे लम्बी नदी कौन-सी है? [2013]
(क) यमुना
(ख) गोदावरी
(ग) कावेरी
(घ) ताप्ती

14. टिहरी बाँध किस नदी पर बनाया गया है? [2016]
(क) रामगंगा पर
(ख) भागीरथी पर
(ग) अलकनन्दा पर
(घ) मन्दाकिनी पर

15. हीराकुड बाँध किस राज्य में स्थित है? [2018]
(क) गुजरात
(ख) आन्ध्र प्रदेश
(ग) ओडिशा
(घ) महाराष्ट्र

उत्तरमाला

1. (क), 2. (क), 3. (ख), 4. (ग), 5. (ग), 6. (घ), 7. (ग), 8. (ग), 9. (ग), 10. (ख), 11. (क), 12. (ग), 13. (ख), 14. (ख), 15. (ग)

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