Mudra Kise Kahate Hain

Mudra Kise Kahate Hain: हेलो स्टूडेंट्स, आज हमने यहां पर मुद्रा की परिभाषा, प्रकार और उदाहरण के बारे में विस्तार से बताया है।Mudra Kise Kahate Hain यह हर कक्षा की परीक्षा में पूछा जाने वाले यह एक महत्वपूर्ण प्रश्न है।

मुद्रा आधुनिक समय में किए गए मनुष्य द्वारा तीन प्रमुख आविष्कारों मुद्रा, पहिया और वोट में से एक है वास्तविकता तो यह है कि मुद्रा के बिना आधुनिक अर्थव्यवस्था की कल्पना ही नहीं की जा सकती यह आर्थिक व्यवहारों को सुचारु रूप से संपादित करने में सहायक होती है ।

Mudra Kise Kahate Hain

मुद्रा की उत्पत्ति विनिमय के माध्यम के रूप में हुई है। अतः वस्तु जो विनिमय के माध्यम का कार्य करती है, वह मुद्रा कहलाती है अर्थात् मुद्रा (Currency) वह वस्तु है, जो सभी प्रकार के लेन-देन में भुगतान के माध्यम के रूप में प्रयुक्त होती है अर्थात् यह एक शक्तिशाली वस्तु है, जो भुगतान के माध्यम के रूप में पूर्णतया स्वीकृत है।

दूसरे शब्दों में, इसे कह सकते हैं कि यह पैसे या धन के उस रूप को कहते हैं जिससे दैनिक जीवन में क्रय और विक्रय होती है Mudra Kise Kahate Hain। इसमें सिक्के और कागज के नोट सम्मिलित होते हैं ।Mudra Kise Kahate Hain आमतौर पर किसी देश में प्रयोग की जाने वाली मुद्रा उस देश की सरकारी व्यवस्था के अंतर्गत बनाई जाती है । जैसे कि भारत में रुपया व पैसा मुद्रा है।

इसे भी पढ़े:Sambahu Tribhuj Kise Kahate Hain – समबाहु त्रिभुज किसे कहते हैं, सूत्र

मुद्रा की विशेषताएँ (Characteristics of Money)

मुद्रा की विभिन्न परिभाषाओं के अध्ययन से मुद्रा की निम्नलिखित विशेषताएँ स्पष्ट होती हैं:

1. सामान्य स्वीकृति

मुद्रा देश के सभी नागरिकों द्वारा बिना किसी आनाकानी के मूल्य के बदले में स्वीकार किया जाता हैMudra Kise Kahate Hain। दूसरे शब्दों में, देश की जनता लेन-देन कार्यों में विनिमय-माध्यम तथा मूल्य-मापक के रुप में स्वीकार करती है।

2. राज्य द्वारा निर्माण

मुद्रा का निर्माण राज्य या सरकार करती हैं। Paper Money के निर्माण में तो यह आवश्यक है कि इसके निर्माण का एकाधिकार सरकार को हो, वह किसी वस्तु को मुद्रा घोषित करे। कुछ देशों में इस कार्य का भार Central bank को सरकार द्वारा सौंप दिया जाता है।

3. मूल्य-संचय का साधन

मुद्रा के द्वारा क्रय-शक्ति को भविष्य के लिए संचित रखा जा सकता है और उसका व्यय भविष्य में आवश्यकतानुसार किया जा सकता है।

4. हास के तत्व का अभाव

मुद्रा में ह्रास होने का भय नहीं रहता। इसमें घिसावट तथा मूल्य-ह्रास की समस्या उत्पन्न नहीं होती। Mudra Kise Kahate Hainनोटों के फट जाने पर साधारण लागत पर इनका नवीकरण हो जाता है किंतु वह भी व्यय जनता को नहीं, सरकार को सहन करना पड़ता है।

5. नगण्य उत्पादन लागत

मुद्रा का उत्पादन-व्यय नहीं के बराबर रहता है।Mudra Kise Kahate Hain मुद्रा की माँग एवं महत्व की तुलना में इसकी कागज और छपाई पर बहुत कम व्यय होता है।

6. मुद्रा का विनिमय मूल्य होता है

मुद्रा की लागत मूल्य अथवा पूर्ति-मूल्य लगभग शून्य होने पर भी मुद्रा का Investment value बहुत अधिक होता है।

7. अपने आप में मुद्रा व्यर्थ होती है

यदि मुद्रा के कार्यों को मुद्रा से हटा दिया जाय तो उस मुद्रा का स्वयं कोई मूल्य नहीं होता।Mudra Kise Kahate Hain उदाहरण के लिये 100 रु0 के नोट का मूल्य विनियोग-संचय, इत्यादि के लिये होता है और इसके बदले में वस्तुएँ तथा सेवाएँ क्रय की जाती हैMudra Kise Kahate Hain। किंतु यदि सरकार उसे मुदा के रुप में स्वीकार न करे, बल्कि उसे रद्द कर दे, तो उस कागज के टुकड़े का कोई मूल्य नहीं होगा।

8. प्रतिस्थापन-लोच का अभाव

मुद्रा में प्रतिस्थापनीय लोच का अभाव होता है। चाहे मुद्रा की माँग बहुत अधिक भी हो जाय किंतु इसे किसी अन्य वस्तु से प्रति स्थापित नहीं किया जा सकता। यदि चावल का अत्यधिक मूल्य बढ़ जाय तो लोग गेहूं खा सकते हैंMudra Kise Kahate Hain। किंतु मुद्रा की माँग बढ़ने पर भी मुद्रा का ही प्रयोग होता है।

इसे भी पढ़े:Purak Kon Kise Kahate Hain – पूरक कोण किसे कहते हैं, परिभाषा, मान

Function of Money?

मुद्रा का कार्य केवल Exchange में सहायता करना ही नहीं है वरन् आधुनिक समाज में यह अनेक महत्वपूर्ण कार्य सम्पादित करती है। मुद्रा के इन्हीं कार्यों के सम्पादित करने के कारण उसका आधुनिक सामाजिक, राजनीतिक एवं आर्थिक क्षेत्रों में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान बन गया है। यह समाज का अभिन्न अंग है।

मुद्रा के कार्यों का निम्नलिखित तीन भागों में विभक्त किया जा सकता है:

A. प्राथमिक कार्य (Primary function)

B. सहायक या गौण कार्य (Secondary function)

C. आकस्मिक कार्य (Contingent function)

(Disadvantages of Money)

जहाँ एक ओर मानव को मुद्रा वरदान के रुप में प्राप्त है, वहीं दूसरी ओर वह दोषों से भी रिक्त नहीं हैMudra Kise Kahate Hain। मुद्रा की अपार शक्ति ने मनुष्य को अपना दास बना लिया है। मनुष्य अपनी स्वतंत्रता खो बैठा और मुद्रा के पीछे पागलों की भाँति दौड़ने लगा। अध्यात्मवाद समाप्त हो गया और उसका स्थान भौतिकवाद ने ले लिया। मुद्रा ही मनुष्य का ईश्वर एवं आराध्य हो गयाMudra Kise Kahate Hain। समाज का नैतिक स्तर गिरने लगा और अनेक सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक समस्याओं का प्रादुर्भाव हो गया। ये इतनी गंभीर समस्याएँ हैं कि इनका निराकरण आज भी संभव नहीं हो सका है।

मुद्रा के मुख्य दोष इस प्रकार हैं:

1. असमानता

मुद्रा ने समाज को दो वर्गो-धनी और निर्धन में विभक्त कर दिया हैMudra Kise Kahate Hain। निर्धन वर्ग धन के अभाव में सदैव हीन बना रहता है और धनी वर्ग धन के कारण धनवान होता जाता है। धनी वर्ग सदैव निर्धनो पर शासन तथा शोषण करता रहा है।

2. पूँजीवाद का जन्म एवं शोषण

मुद्रा ही वह शक्ति है जिसके द्वारा पूँजीपति श्रमिकों का शोषण करते हैंMudra Kise Kahate Hain। वे अधिक-से-अधिक धन अपने लिए रखना चाहते हैं और धनहीन श्रमिकों को मुद्रा की शक्ति के आगे झुकना पड़ता है। इससे समाज में केवल कुछ थोड़े से व्यक्तियों के हाथों में ही आर्थिक सत्ता केन्द्रित हो जाती है और एकाधिकार की प्रवृत्तियों को प्रोत्साहन मिलता है।

3. नैतिक पतन

मनुष्य मुद्रा का दास है। मुद्रा प्राप्त करने के लिए वह झूठ है, बेईमानी करता है और दूसरों के साथ अन्याय करता हैMudra Kise Kahate Hain। मनुष्य के नैतिक पतन का मुख्य बोलता कारण मुद्रा ही है। आज चोरबाजारी, घूसखोरी इत्यादि मुद्रा के कारण ही है।Mudra Kise Kahate Hain आज भारत में काले धन और तस्करी की समस्या भी नैतिक पतन का जीता-जागता उदाहरण है। रस्किन ने ठीक ही लिखा है

युद्ध

युद्ध का मुख्य कारण मुद्रा ही है। प्रत्येक मनुष्य एवं राष्ट्र सदैव अधिकाधिक सम्पत्ति-वैभव चाहता है और यही भावना युद्ध को प्रोत्साहन देती है।

5. मुद्रा के मूल्य में अस्थिरता

मुद्रा-स्फीति एवं मुद्रा-संकुचन के कारण प्राय: मुद्रा के मूल्य में परिवर्तन होते रहते हैंMudra Kise Kahate Hain। इससे देश के वाणिज्य एवं व्यवसाय पर और समाज के विभिन्न वर्गो पर बुरा प्रभाव पड़ता है। वर्तमान समय में भारत में मुद्रा-प्रसार होने के कारण मूल्यों में निरंतर वृद्धि की समस्या है और मूल्य वृद्धि के प्रभावों से सामान्य जनता अत्यधिक पीड़ित है।

6. सामाजिक अशांति

मनुष्य मुद्रा के मोह में अँधा हो जाता है। चोरी, डकैती, हत्या इत्यादि घटनाओं का मुख्य कारण मुद्रा ही है।Mudra Kise Kahate Hain सामाजिक अंशाति का मूल कारण मुद्रा का मोह है। पूँजीपति एवं श्रमिक वर्ग में निरंतर संघर्ष की स्थिति बनी रहती है। कभी हड़तालें होती है तो कभी तालाबन्दी। सारा समाज अंशात हो उठता है और शांति-स्थापना की समस्या सरकार के सम्मुख विकराल रुप धारण कर लेती है।

7. ऋणग्रस्तता में वृद्धि तथा अपव्यय की प्रवृत्ति

उधार लेन-देन की क्रियाओं को मुद्रा अत्यन्त सरल बना देती है जिससे लोगों में उधार लेने की आदत को प्रोत्साहन मिलता है।Mudra Kise Kahate Hain वही ऋणग्रस्तता एवं अपव्यय का कारण बन जाती है। कर्ज तो ऐसा मेहमान है जो एक बार आने के बाद जाने का नाम नहीं लेता है। केवल एक बार ऋण लिया नहीं कि उसके चक्कर में जीवन भर पड़े रहना पड़ता है।

मुद्रा के कितने प्रकार होते है? How many Types of Money?

अपने उदय काल से ही मुद्रा विभिन्न रूपों में प्रयुक्त होती आयी है। यदि हम मुद्रा के विकास के इतिहास का ध्यान पूर्वक अध्ययन करें तो हमें ज्ञात होगा कि प्रारम्भ में साधारण वस्तुएँ जैसे- खाल, हड्डियाँ इत्यादि मुद्रा के रुप में प्रयुक्त की जाती थी। Mudra Kise Kahate Hainएक प्रकार से यह मुद्रा Commodity money का प्रारंभिक समय था। इसके बाद वस्तु मुद्रा के न सिर्फ रुप में ही परिवर्तन हुआ वरन् इसने अपना स्थान Metallic money को दे दिया।

तदुपरात Metallic money का स्थान आज की Paper Money & Credit money ने ले लिया है।Mudra Kise Kahate Hain वर्तमान समय में संसार के भिन्न-भिन्न स्थानों पर भिन्न-भिन्न प्रकार की मुद्राओं का चलन है। अत: हम यहाँ मुद्रा के वर्गीकरण का अध्ययन करने के हेतु मुद्रा के उन्हीं रुपों का वर्णन करेंगे जो विभिन्न विचारकों के मत-मतान्तरों द्वारा महत्वपूर्ण रुप में प्रमाणित किये गये हैं।

इसे भी पढ़े:Pulling Kise Kahate Hain – पुल्लिंग किसे कहते हैं? पुल्लिंग शब्द, उदाहरण

मुद्रा के प्रकार (मुद्रा का वर्गीकरण) निम्न रुप में है:

1. वास्तविक मुद्रा एवं लेखे की मुद्रा

2. पूर्ण एवं प्रतिनिधि मुद्रा

3. विधि-ग्राह्य मुद्रा एवं ऐच्छिक मुद्रा

4. धातु मुद्रा एवं पत्र-मुद्रा

इन रुपों पर विभिन्न मुद्राशास्त्रियों ने काफी विचार-विमर्श किया हैMudra Kise Kahate Hain एवं उन्होंने मुद्रा के अनेक रुपों (Sub forms) को जन्म दिया है, यथा-विधि-ग्राह्य मुद्रा को दो भागों में, सीमित विधि-ग्राह्य मुद्रा और असीमित विधि-ग्राह्य मुद्रा तथा प्रतिनिधि परिवर्तनशील एवं अपरिवर्तनशील मुद्रा के रुप विभक्त किया है

इस आर्टिकल में अपने पढ़ा कि,  मुद्रा किसे कहते हैं। हमे उम्मीद है कि उपर दी गयी जानकारी आपको आवश्य पसंद आई होगी। इसी तरह की जानकारी अपने दोस्तों के साथ ज़रूर शेयर करे ।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top