संतत आवेश वितरण ( Continuous Charge Distribution )

आवेश वितरण क्या होता है –(Charge Distribution):

यह दो प्रकार का होता है |

1. असतत आवेश वितरण (Discontinuous Charge Distribution)

2. सतत आवेश वितरण (Continuous Charge Distribution)

संतत आवेश वितरण क्या होता है :

इस प्रकार के वितरण में किसी वस्तु पर आवेश  एकसमान रूप से वितरित रहता है|  

” जब एक बहुत बड़ी संख्या में आवेश परस्पर एक दूसरे के निकट उपस्थित होते है तो इन आवेशों को संतत रूप से वितरित माना जाता है। ”  

मान लीजिये एक छड़ पर 1 नैनो कूलाम आवेश उपस्थित है इसका तात्पर्य यह है की उस छड़ पर 1010 बिन्दु आवेश उपस्थित है यदि किसी बिंदु पर इस छड़ के कारण विद्युत क्षेत्र की तीव्रता ज्ञात करनी पड़े तो कूलॉम के अध्यारोपण सिद्धान्त से यदि प्रत्येक आवेश के कारण उस बिन्दु पर वैधुत क्षेत्र की तीव्रता ज्ञात की जावे तथा फिर सभी आवेशों के कारण प्राप्त विधुत क्षेत्रों का सदिश योग किया जाए तो यह प्रक्रिया बहुत ही जटिल हो जाती है।   इस प्रकार की समस्याओं से बचने के लिए हम आवेश की सतत मानते है तथा आवेश घनत्व की अवधारणा उपयोग करते हुए कलन विधि द्वारा उस बिंदु पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता ज्ञात करते है जो की बहुत आसान है।    

मान लीजिये किसी वस्तु पर q आवेश उपस्थित है तो इसे हम बहुत सारे सूक्ष्म आवेशों dq में बाँट लेते है।  

यदि यह आवेश एक विमा में विचरित करता है तो इसे रेखीय आवेश वितरण (लम्बाई के अनुदिश) , अगर आवेश दो विमाओ में विचरित करता है तो इसे पृष्ठ आवेश वितरण (क्षेत्रफल के अनुदिश) तथा यदि आवेश तीन विमाओं में विचरित करता है तो इसे आयतन वितरण (आयतन के अनुदिश) कहते है।

  इन्हे संक्षिप्त में निम्न प्रकार समझाया जा सकता है।    

  • रेखीय आवेश वितरण (Linear Charge Distribution In Hindi) :

जब आवेश लम्बाई के अनुदिश या एक रेखा के रूप में वितरित होता है , यह रेखा बहुत पतली मानी जाती है तथा पूरा आवेश इस पतली तार की सतह (परिधि) पर वितरित माना जाता है। आवेश के इस प्रकार के वितरण को रेखीय आवेश वितरण कहा जाता है।  

  माना dq रेखीय घनत्व का आवेश रेखीय रूप में वितरित है यहाँ dq (आवेश अल्पांश ) की लम्बाई को यदि dx मानी जाए तो इसे λ से व्यक्त करते है।   रेखीय आवेश वितरण की परिभाषा   λ = dq /dx   कुल आवेश dq =  λ .dx    = रेखीय आवेश वितरण x लम्बाई   मात्रक = कुलाम /m    

  • पृष्ठ आवेश वितरण (Surface Charge Distribution In Hindi) :

जब आवेश दो विमाओं में वितरित रहता है या क्षेत्रफल के अनुदिश आवेश के वितरण को पृष्ठ आवेश वितरण कहते है। माना किसी किसी शीट पर आवेश वितरित है जिसकी मोटाई अत्यंत अल्प हो अर्थात आवेश केवल दो विमाओं में हो , यदि इस पर आवेश वितरित होगा तो यह इसी लम्बाई व चौड़ाई के अनुदिश वितरित होगा अतः यह द्विविमी वितरण या पृष्ठ आवेश वितरण को क्षेत्रफल आवेश वितरण कहते है। इसे σ से व्यक्त करते है।

  माना dq पृष्ठीय आवेश घनत्व क्षेत्रफल dA के अनुदिश वितरित है तो आवेश वितरण की परिभाषा से    σ = dq /dA   कुल आवेश dq = σ . dA   मात्रक = C/m2

  • आयतन आवेश वितरण (Volume Charge Distribution In Hindi)

जब आवेश तीनों विमाओ में विलगित है अर्थात लम्बाई , चौड़ाई तथा ऊंचाई वाली वस्तुओ पर , यदि आवेश वितरित है तो इस प्रकार के वितरण को आयतन कहते है।

  इसे ρ से व्यक्त करते है इसका मात्रक C/m3 होता है।   माना dq आवेश आयतन अल्पांश dV में वितरित है तो आयतन आवेश वितरण की परिभाषा से   ρ  = dq /dV   अल्पांश पर कुल आवेश dq = ρ.dV      

 संतत आवेश वितरण के कारण विद्युत क्षेत्र  (Electric Field Due to a Continuous Charge Distribution in Hindi ) :

  संतत आवेश वितरण के कारण विद्युत क्षेत्र ज्ञात करने के लिए हम,  इस आवेश वितरण का एक अल्पांश dq लेते है यह अल्पांश रेखीय , पृष्ठीय या आयतन संतत आवेश वितरण का हो सकता है।   आवेश अल्पांश dq के कारण बिंदु P पर जो की r दूरी पर स्थित है विद्युत क्षेत्र की तीव्रता  

  इसकी दिशा जब P बिन्दु पर एक धन परिक्षण आवेश रखा जाए और जिस दिशा में इस धन आवेश पर बल लगता है। चूँकि P बिंदु पर हमने आवेश dq के कारण विद्युत क्षेत्र की तीव्रता ज्ञात की है |   अब यदि हम P बिंदु पर कुल विद्युत क्षेत्र की तीव्रता (परिणामी) ज्ञात करनी हो तो अल्पांशो के कारण विद्युत क्षेत्रों को सदिश योग अर्थात समाकलन किया जाता है।   अतः संतत आवेश वितरण के कारण P बिंदु पर कुल (परिणामी) विद्युत क्षेत्र की तीव्रता  

Special Case :   1. यदि आवेश अल्पांश रेखीय संतत आवेश वितरण है तो   dq = λ dl (रेखीय संतत आवेश वितरण से ) अतः विद्युत क्षेत्र की तीव्रता  

2. यदि आवेश अल्पांश पृष्ठीय आवेश वितरण का है तो

dq = σ dS
अतः P बिंदु पर विद्युत क्षेत्र की तीव्रता

3. यदि अल्पांश आयतन वितरण का लिया गया है तो

dq = ρ dV
अतः परिणामी विद्युत क्षेत्र

Note : dq के कारण dE विभिन्न दिशाओं में हो सकते है यह एक त्रिविम सदिश है।  अतः इसकी कार्तीय घटक के रूप में ज्ञात किया जाता है।
E के कार्तीय घटक E, Ey , Ez होंगे

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