प्रेरण द्वारा आवेशन कैसे होता है – Charging by Induction

प्रेरण द्वारा आवेशन – Charging by Induction ?

किसी अनावेशित वस्तु से स्पर्श कराये बिना ही अनावेशित वस्तु को आवेशित करने की विधि को प्रेरण द्वारा आवेशन कहते है। प्रेरण द्वारा आवेशन विधि में अनावेशित वस्तु पर आवेशित वस्तु का विपरीत आवेश उत्पन्न होता है।

प्रेरण द्वारा आवेशन को निम्न उदाहरण द्वारा स्पष्ट रूप रूप से समझा जा सकता है। प्रेरण द्वारा आवेशन को निम्न उदाहरण द्वारा स्पष्ट रूप रूप से समझा जा सकता है जैसा कि चित्र में दर्शाया गया है। कि एक अनावेशित गेंद को कुचालक स्टैंड पर सेट करते है जैसा चित्र में दर्शाया गया है।

प्रेरण द्वारा आवेशन - Charging by Induction

जब हम किसी सरकंडे की गोली से किसी आवेशित प्लास्टिक-छड़ को स्पर्श कराते हैं तो छड़ का कुछ आवेश सरकंडे की गोली पर स्थानांतरित हो जाता है और वह आवेशित हो जाती है। इस प्रकार सरकंडे की गोली संपर्क द्वारा आवेशित होती है। तब यह प्लास्टिक-छड़ से प्रतिकर्षित होती है तथा काँच की छड़ जो विजातीय आवेशित है, की ओर आकर्षित होती है।

परंतु, कोई विद्युन्मय छड़ हलकी वस्तुओं को क्यों आकर्षित करती है, इस प्रश्न का उत्तर अभी भी नहीं मिल पाया है। आइए, हम यह समझने का प्रयास करें कि निम्नलिखित प्रयोग को करने पर क्या हो सकता है।

(i) विद्युतरोधी स्टैंडों पर रखे दो धातु के गोलों A एवं B को चित्र 1.4 (a) में दर्शाए अनुसार एक दूसरे के संपर्क में लाइए।

(ii) एक धनावेशित छड़ इन गोलों में किसी एक (माना A) के निकट लाइए तथा यह सावधानी बरतिए कि छड़ गोले से स्पर्श न करे। गोले के मुक्त इलेक्ट्रॉन छड़ की ओर आकर्षित होते हैं। गोले B के पिछले पृष्ठ पर धनावेश का आधिक्य हो जाता है। दोनों प्रकार के आवेश धातु के गोलों में आबद्ध रहते हैं, पलायन नहीं कर पाते।

अतः वे पृष्ठों पर ही चित्र 1.4(b) में दर्शाए अनुसार रहते हैं। गोले A के बाएँ पृष्ठ पर ऋणावेश का आधिक्य तथा गोले के दाएँ पृष्ठ पर धनात्मक आवेश का आधिक्य होता है। तथापि गोले के सारे इलेक्ट्रॉन गोले A के बाएँ पृष्ठ पर संचित नहीं होते। जैसे ही गोले A के बाएँ पृष्ठ पर इलेक्ट्रॉन एकत्र होने शुरू होते हैं अन्य इलेक्ट्रॉन इनके द्वारा प्रतिकर्षित हो जाते हैं।

कुछ ही क्षण में छड़ के आकर्षण के कारण क्रिया तथा संचित आवेशों के कारण प्रतिकर्षण के बीच साम्य स्थापित हो जाता है। चित्र 1.4(b) साम्यावस्था को दर्शाता है। इस प्रक्रिया को आवेश का प्रेरण कहते हैं तथा यह लगभग तात्कालिक है। जब तक काँच की छड़ गोले के निकट रहती है तब तक चित्र में दर्शाए अनुसार संचित आवेश पृष्ठ पर रहता है।

यदि छड़ को हटा लेते हैं तो आवेशों पर कोई बाह्य बल कार्य नहीं करता तथा वे अपनी उदासीन अवस्था में वापस लौट जाते हैं।

(iii) चित्र 1.4(c) में दर्शाए अनुसार काँच की छड़ को बाएँ गोले के निकट रखते हुए दोनों गोलों को एक-दूसरे से कुछ पृथक कीजिए। ऐसा करने पर दोनों गोले विजातीय आवेशों द्वारा आवेशित होकर एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं।

(iv) छड़ को हटा लीजिए। गोलों पर आवेश चित्र 1.4(d) में दर्शाए अनुसार स्वयं को पुनर्व्यवस्थित __कर लेते हैं।

इस प्रक्रिया में धातु के गोले आवेशित हो जाते हैं। धनावेशित काँच की छड़ के आवेश की कोई क्षति नहीं होती, जो संपर्क द्वारा आवेशित करने की प्रक्रिया के विपरीत है।

उदाहरण :

आप किसी धातु के गोले को स्पर्श किए बिना कैसे धनावेशित कर सकते हैं?

उत्तर:

जैसा की चित्र 1.5(a) में किसी विद्युतरोधी धातु के स्टैंड पर कोई अनावेशित धातु का गोला रखा दर्शाया गया है। चित्र 1.5(b) में दर्शाए अनुसार इस गोले के निकट कोई ऋणावेशित छड़ लाइए। गोले के मुक्त इलेक्ट्रॉन प्रतिकर्षण के कारण दूर जाकर दूरस्थ सिरे पर एकत्र हो जाते हैं। पास का सिरा इलेक्ट्रॉनों की कमी के कारण धनावेशित हो जाता है। जब गोले की धातु के मुक्त इलेक्ट्रॉनों पर लगने वाला नेट बल शून्य हो जाता है तो आवेशों के वितरण की यह प्रक्रिया बंद हो जाती है।

किसी चालक तार द्वारा गोले को भूसंपति कीजिए। इलेक्ट्रॉन भूमि में प्रवाहित हो जाएँगे जबकि पास के सिरे का धनावेश, छड़ के ऋणावेश के आकर्षण बल के कारण चित्र 1.5(c) में दर्शाए अनुसार बद्ध रहेगा। गोले का भूसंपर्क तोड़ दीजिए। पास के सिरे पर धनावेश की बद्धता बनी रहती है [चित्र 1.5(d)]। विद्युन्मय छड़ को हटा लीजिए। चित्र 1.5(e) में दर्शाए अनुसार धनावेश गोले के पृष्ठ पर एकसमान रूप से फैल जाता है।

इस प्रयोग में धातु का गोला प्रेरण की प्रक्रिया द्वारा आवेशित हो जाता है तथा छड़ अपना कोई आवेश नहीं खोती।

प्रेरण द्वारा धातु के गोले को ऋणावेशित करने की प्रक्रिया के भी ये ही चरण होते हैं, इसमें धनावेशित छड़ गोले के समीप लाई जाती है। इस प्रकरण में इलेक्ट्रॉन भूमि से गोले में उस समय स्थानांतरित (प्रवाहित) होते हैं जब तार द्वारा गोले को भूसंपर्कित किया जाता है। क्या आप इसका कारण स्पष्ट कर सकते हैं?

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