प्रकाश उत्सर्जन डायोड (LED) | सौर सेल की बनावट व कार्य प्रणाली

प्रकाश उत्सर्जक डायोड (Light emitting diode):- ये ऐसे डायोड है जो परिपथ में अग्र बायस में जोड़ने पर प्रकाश उत्सर्जन करते है इन्हें अत्याधिक मात्रा में अशुद्वि को अपमिश्रण करके बनाया जाता है तथा इन्हें पारदर्शी आवरण में बन्द कर देते हैं ताकि प्रकाश का उत्सर्जन हो सके।

कार्य प्रणाली (working):- जब pn संधि डायोड को अग्र बायसीत करते है तो p भाग के कोटर और n भाग e संधि तल की ओर गति करते है जहाँ इनका पुनः संयोजन होता है। जिससे फोटोन का उत्सर्जन होता है। उत्सर्जित कोटोन प्रकाश के रूप में प्राप्त हो इसके लिए बैण्ड अन्तराल का मान 1.8 ev से अधिक होना चाहिए। यदि Ga , As , P अर्द्धचालक ले तो इनका वर्जित ऊर्जा अन्तराल 1.9 ev होता है और प्राप्त प्रोटोन लाल रंग के होंगे यदि अर्द्धचालक गौलियम आर्सेमाइड ले तो इनका वर्जित ऊर्जा Eg का मान 1.43 ev होता है इससे प्राप्त प्रोटाॅन अवरक्त तरंग के होते है ऐसे डायोड सुदूर निंयत्रण चोर घण्टी संयंत्र बनने में उपयुक्त होते है।

LED ताप द्धिप्त लेम्बों की तुलना में क्यों लाभकारी:-

1. कम वोल्टता एवं कम क्षति पर कार्य करते है।

2. तुरन्त क्रिया होती है इन्हें गर्म करने की आवश्यकता नहीं।

3. ये एक वर्णी प्रकाश का उत्सर्जन करते है।

4. इनमें तुरन्त बंद व शुरू होने की सुविधा होती है।

5. इनकी आयु अधिक एवं ये सुदृढ़ होते है।

सौर सेल की बनावट व कार्य प्रणाली समझाइये। ये फोटो डायोड से किस प्रकार भिन्न है इसमें होने वाली मूल क्रियाओं को लिखिए तथा इसके लिए काम में लेने वाले अर्द्धचालक की विशेषताएँ :-

सौर सैल:- यह ऐसा डायोड है जो विद्युत चुम्बकीय विकिरण ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करा है यह फोटो डायोड की तरह है लेकिन कुछ भिन्नाऐं है।

1. इसमें फोटो डायोड की तरह बाहरी बायस की आवश्यकता नही है।

2. इसमें संधि क्षेत्र का क्षेत्रफल अधिक रखा जाता है क्योंकि अधिक विकिरण को अवशोषित करके अधिक मात्रा में विद्युत धारा प्राप्त कर सकें।

जब संधि तल पर विकिरण आपतित हो तो तीन महत्वपूर्ण क्रियाऐं होती है –

1. जनन – जब संधि तल पर विकिरण के फोटोन आपतित होते है तो इलेक्ट्रान हाॅल युग्म का उत्पादन होता है।

2. पृथक्करण :- संधि तल पर e हाॅल युग्म उत्पन्न स्त्रोत है ये ह्यासी क्षेत्र के विद्युत क्षेत्र के द्वारा पृथक हो जाते है। इलेक्ट्रॉन n  भाग की ओर तथा हाॅल p  भाग की ओर गति करते है।

3. संग्रह:- electron अग्र सम्पर्क पर संग्रह किये जाते है। जबकि हाॅल पश्च सम्पर्क पर संग्रह किये जाते है इस प्रकार एक सिरा धनात्मक तथा दूसरा सीरा ऋणात्मक बनने से विद्युत वाहक बल उत्पन्न हो जाता है जिससे परिपथ में धारा बहती है।

सौर सैल (Solar cell) बनाने के लिए अर्द्धचालक में निम्न विशेषताएँ : –

1. बैण्ड अन्तराल का मान एक इलेक्ट्रॉन  वोल्ट से 1.8 ev के मध्य होना चाहिए।

2. प्रकाश अवशोषण क्षमता अधिक होनी चाहिए।

3. विद्युत चालकता अधिक होनी चाहिए।

4. कच्चे माल की उपलब्धता अधिक होनी चाहिए।

5. लागत कम होनी चाहिए।

Remark:

दोस्तों अगर आपको इस Topic के समझने में कही भी कोई परेशांनी हो रही हो तो आप Comment करके हमे बता सकते है | इस टॉपिक के expert हमारे टीम मेंबर आपको जरूर solution प्रदान करेंगे|

Leave a Comment

Your email address will not be published.