दण्ड चुम्बक के गुण क्या है | चुम्बकीय प्रेरण | विचुंबकन

दंड चुंबक लोहे ,स्टील या फेरोमैग्नेटिक पदार्थ की बनी हुई आयताकार चुम्बक होती है। इसका उपयोग बहुतायत से विभिन्न क्षेत्रों में किया जाता है।
यहाँ हम दण्ड चुम्बक के गुणों के बारे में विस्तार से अध्ययन करेंगे.

1. पदार्थों को आकर्षित करने की प्रवृत्ति:

दण्ड चुम्बक में लोह पदार्थों जैसे लोहा , कोबाल्ट को आकर्षित करने का गुण पाया जाता है , चूँकि चुंबक के सिरों पर चुम्बकत्व गुण अधिकतम होता है इसलिए पदार्थो को आकर्षित करने की प्रवृत्ति भी सिरों (ध्रुवों) पर सबसे ज्यादा होती है।

2. दिशा बताने का गुण:

यदि हम किसी दंड चुम्बक को स्वतंत्रता पूर्वक लटकाये तो इस चुम्बक के ध्रुव एक निश्चित दिशा उत्तर-दक्षिण में ही ठहरते है , अर्थात चुम्बक का एक ध्रुव उत्तर में ठहरता है तथा दूसरा सिरा (ध्रुव) दक्षिण दिशा में ठहरता है। जो सिरा उत्तर की तरफ ठहरता है उसे चुम्बक का उत्तरी ध्रुव (N) तथा जो सिरा (ध्रुव) दक्षिण की तरफ ठहरता है उसे चुंबक का दक्षिणी ध्रुव कहते है

3. ध्रुवों की युग्म प्रवृत्ति:

जैसा की हम सब जानते है की चुम्बक में दो ध्रुव उत्तरी तथा दक्षिणी पाए जाते है लेकिन यह याद रखे की ये हमेशा एक चुंबक में दोनों ध्रुव एक साथ मिलते है अर्थात किन्ही भी तरीकों से चुम्बक के ध्रुवों को अलग अलग नहीं किया जा सकता , जब एक चुम्बक को तोडा भी जाता है तो दोनों चुंबक अलग अलग चुंबक की तरह व्यवहार करती है लेकिन दोनों में दोनों ध्रुव एक साथ पाए जाते है अर्थात दक्षिण तथा उत्तरी ध्रुव दोनों चुंबक में मिलते है इनको किसी विधि से अलग नहीं किया जा सकता।

4. समान ध्रुवों में प्रतिकर्षण तथा असमान ध्रुवो में आक्रषण:

चुम्बक के समान ध्रुवों जब पास में लाया जाता है तो दोनों सिरे एक दूसरे को प्रतिकर्षित करते है इसी प्रकार जब असमान ध्रुवों को आपस में लाया जाता है तो दोनों ध्रुव एक दूसरे को आकर्षित करते है।

5. ध्रुवों को तोड़ने या विभक्त करने पर प्रबलता गुण:

जब किसी दण्ड चुम्बक को इसकी अक्ष के लंबवत दो समान भागों में काटा जाए या तोडा जाए तो प्रत्येक भाग के ध्रुवों की प्रबलता पहले के समान ही रहती है।

जब किसी दंड चुंबक को इसकी अक्ष के अनुदिश दो भागों में बांटा जाए तो ध्रुव प्रबलता पहले की तुलना में आधी रह जाती है।

6. चुम्बकीय प्रेरण का गुण:

जब किसी दण्ड चुम्बक के पास में कोई चुम्बकीय पदार्थ लाया जाता है तो चुम्बकीय पदार्थ में चुंबकत्व का गुण आ जाता है इसे चुम्बकीय प्रेरण का गुण कहते है।

7. विचुंबकन का गुण:

किसी चुम्बक से चुम्बकत्व गुणों को नष्ट करना विचुंबकन कहलाता है , विचुंबकन के लिए चुम्बक को गरम किया जाता है या पिटाई की जाती है जिससे उसके चुम्बकीय गुण नष्ट हो जाते है।

Remark:

दोस्तों अगर आपको इस Topic के समझने में कही भी कोई परेशांनी हो रही हो तो आप Comment करके हमे बता सकते है | इस टॉपिक के expert हमारे टीम मेंबर आपको जरूर solution प्रदान करेंगे|

Leave a Comment

Your email address will not be published.