अध्यारोपण का सिद्धांत | बहुल आवेशों के बीच बल

बहुल आवेशों के बीच बल:

दो आवेशों के बीच पारस्परिक वैद्युत बल कूलॉम नियम द्वारा प्राप्त होता है। उस स्थिति में किसी आवेश पर आरोपित बल का परिकलन कैसे करें, जहाँ उसके निकट एक आवेश न होकर उसे बहुत से आवेश चारों ओर से घेरे हों?

निर्वात में स्थित n स्थिर आवेशों q1,q2,q3, … qn, के निकाय पर विचार कीजिए। q1, q2 …, qn के कारण कितना बल लगता है? इसका उत्तर देने के लिए कूलॉम नियम पर्याप्त नहीं है। याद कीजिए, यांत्रिक मूल के बलों का 4 संयोजन सदिशों के संयोजन के समांतर चतुर्भुज नियम द्वारा किया जाता है। क्या यही स्थिरवैद्युत मूल के बलों पर भी लागू होता है?

अध्यारोपण का सिद्धांत / नियम – Adhyaropan Ka Sidhant:

प्रयोगों द्वारा यह सत्यापित हो चुका है कि किसी आवेश पर कई अन्य 12 आवेशों के कारण बल उस आवेश पर लगे उन सभी बलों के सदिश योग के बराबर होता है जो इन आवेशों द्वारा इस आवेश पर एक-एक कर लगाया जाता है।

“किसी एक आवेश द्वारा लगाया गया विशिष्ट बल अन्य आवेशों की उपस्थिति के कारण प्रभावित नहीं होता। इसे अध्यारोपण का सिद्धांत कहते हैं।”

                                           अथवा

किसी स्थिर बिंदु आवेश पर अन्य आवेशों (स्थिर ) के कारण लगने वाला परिणामी बल उस आवेश पर लगने वाले सभी बलों के सदिश योग के बराबर होता है।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *