UP Board Solutions for Class 10 Commerce Chapter 6 नस्तीकरण या फाइलिंग

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बहुविकल्पीय प्रश्न ( 1 अंक)

प्रश्न 1.
नस्तीकरण का उद्देश्य होता है
(a) पुनः आदेशों की पूर्ति के लिए
(b) मतभेदों का निपटारा करना
(c) पत्रों को सुरक्षित रखने हेतु
(d) ये सभी
उत्तर:
(d) ये सभी

प्रश्न 2.
फाइलिंग का सबसे पुराना तरीका है
(a) कार्ड-बोर्ड फाइल
(b) तार फाइल
(C) खड़ी फाइल
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(b) तार फाइल

प्रश्न 3.
नस्तीकरण की किस प्रणाली के अन्तर्गत पत्रों को खड़ी अवस्था में रखा जाता है?
(a) नस्तीकरण की पट प्रणाली
(b) नस्तीकरण की तिरछी प्रणाली
(c) नस्तीकरण की खड़ी प्रणाली
(d) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
(c) नस्तीकरण की खड़ी प्रणाली

प्रश्न 4.
अनुपस्थिति कार्ड का प्रयोग किस फाइल में किया जाता है? (2014)
(a) कबूतरखाने वाली फाइल में
(b) तार फाइले में।
(c) शैनन फाइल में
(d) खड़ी फाइल में
उत्तर:
(d) खड़ी फाइल में

निश्चित उत्तरीय प्रश्न (1 अंक)

प्रश्न 1.
नस्तीकरण का एक लाभ लिखिए। (2015)
उत्तर:
नस्तीकरण के द्वारा पत्रों को क्रमबद्ध रूप में भविष्य के लिए सँभालकर रखा जाता है।

प्रश्न 2.
‘कबूतरखाने वाली फाइल’ में कितने खाने होते हैं?
उत्तर:
24 खाने

प्रश्न 3.
बैंक के लिए नस्तीकरण की कौन-सी विधि उपयुक्त होती है?
उत्तर:
खेड़ी फाइल

प्रश्न 4.
प्राप्त पत्रों को सुरक्षित रखने वाले विभाग का नाम बताइए। (2012)
उत्तर:
पत्राचार विभाग

प्रश्न 5.
बाहर जाने वाले पत्रों का रिकॉर्ड रखे जाने वाले रजिस्टर का नाम लिखिए। (2014, 12)
उत्तर:
पत्र-प्रेषित पुस्तक या रजिस्टर

प्रश्न 6.
जिस रजिस्टर में आने वाले पत्रों का विवरण लिखा जाता है, उसका नाम लिखिए। (2013)
उत्तर:
पत्र-प्राप्ति पुस्तक या रजिस्टर

अतिलघु उत्तरीय प्रश्न (2 अंक)

प्रश्न 1.
पड़ी या समतल फाइलिंग क्या है? इसके दो दोषों का उल्लेख कीजिए। (2013)
उत्तर:
इस प्रणाली में पत्रों को लेटी या पट अवस्था में रखा जाता है। इसमें पत्र तिथिवार फाइल किए जाते हैं अर्थात् जो पत्र पहले आता है, वह पहले रखा जाता है तथा जो बाद में आता है, वह बाद में रखा जाता है। यह छोटे-बड़े दोनों कार्यालयों में प्रयोग होती है। इस प्रणाली के दोष निम्नलिखित हैं

  1. असुरक्षा इस प्रणाली के अन्तर्गत जरा-सी असावधानी से पत्रों में धूल | जम जाती है, कीड़े-मकोड़े पत्रों को नष्ट कर सकते हैं। इस प्रकार असुरक्षा का भय रहता है।
  2. असुविधा इस प्रणाली में नीचे के पत्रों को निकालने में असुविधा रहती है और पत्रों के गिर जाने का भय भी रहता है।

प्रश्न 2.
लेटी हुई नस्तीकरण प्रणाली की किन्हीं चार विधियों के नाम लिखिए। (2016)
उत्तर:
लेटी हुई नस्तीकरण प्रणाली की चार विधियों के नाम निम्नलिखित

  1. तार फाइल
  2. फोल्डर फाइल
  3. कार्ड-बोर्ड या दफ्ती की फाइल
  4. लोहे की मुड़ी हुई शलाकाओं वाली फाइल

प्रश्न 3.
डॉकेटिंग क्या है? (2014)
उत्तर:
पत्रों को मोड़ने के बाद उसके ऊपर हवाले के रूप में संक्षिप्त विवरण लिखा जाता है, जो डॉकेटिंग कहलाता है।

डॉकेटिंग का नमूना

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प्रश्न 4.
खड़ी नस्तीकरण प्रणाली की चार विशेषताओं का उल्लेख कीजिए। (2018, 16)
उत्तर:
खड़ी नस्तीकरण प्रणाली की चार विशेषताएँ निम्नलिखित हैं

  1. इस प्रणाली में गोपनीयता एवं सुरक्षा का गुण सर्वाधिक पाया जाता है
  2. इस प्रणाली के अन्तर्गत आवश्यकता के समय पत्रों को शीघ्रता से ढूंढा जा सकता है
  3. यह प्रणाली काफी लोचदार है
  4. इस प्रणाली में पत्रों को संग्रहित करके रखने में सुविधा रहती है

प्रश्न 5.
नस्तीकरण की खड़ी प्रणाली के अन्तर्गत फोल्डरों को दराज में रखने के कितने क्रम हैं?
उत्तर:
नस्तीकरण की खड़ी प्रणाली के अन्तर्गत फोल्डरों को दराज में रखने के निम्नलिखित क्रम हैं

  1. वर्णमाला क्रम
  2. भौगोलिक क्रम
  3. संख्या क्रम
  4. वर्णमाला एवं संख्या दोनों के आधार पर रखने का क्रम
  5. विषय के अनुसार क्रम

प्रश्न 6.
‘नस्तीकरण’ की श्रेष्ठ प्रणाली कौन-सी है? (2017)
उत्तर:
नस्तीकरण की खड़ी प्रणाली सुव्यवस्थित, वैज्ञानिक एवं लोचदार है। अतः यह नस्तीकरण की सर्वोत्तम, आधुनिक तथा सर्वश्रेष्ठ प्रणाली मानी जाती है।

लघु उत्तरीय प्रश्न (4 अंक)

प्रश्न 1.
पड़ी फाइलिंग के गुण एवं दोषों का वर्णन कीजिए। (2008)
उत्तर:
पड़ी फाइलिंग के गुण पड़ी फाइलिंग के गुण निम्नलिखित हैं

  1. सरलता पड़ी फाइल प्रणाली अत्यन्त सरल होती है। इस प्रणाली में पत्रों को आसानी से रखा जा सकता है और निकाला भी जा सकता है। इस प्रकार, यह प्रणाली अन्य प्रणालियों की तुलना में सरल है।
  2. सुरक्षा इस प्रणाली में पत्रों को बाँधकर रखा जाता है, जिससे पत्र सुरक्षित रहते हैं।
  3. सस्ती प्रणाली यह प्रणाली अन्य प्रणालियों की तुलना में अपेक्षाकृत सस्ती है, इसलिए यह प्रणाली काफी लोकप्रिय है।
  4. कम स्थान घेरना यह प्रणाली अन्य प्रणालियों से कम स्थान घेरती है।
  5. उपयुक्त प्रणाली यह प्रणाली छोटे व्यापारियों के लिए उपयुक्त होती है।
  6. प्रशिक्षण नहीं नया व्यक्ति भी इस प्रणाली को सरलता से समझ सकता है। इसमें किसी प्रकार के विशेष प्रशिक्षण की आवश्यकता नहीं रहती है।
  7. अनुक्रमणिका (सूची) साथ में होना इस प्रणाली में अनुक्रमणिका साथ में होती है।

पड़ी फाइलिंग के दोष पड़ी फाइलिंग प्रणाली के दोष निम्नलिखित हैं-

  1. सुरक्षा का अभाव इस प्रणाली में पत्रों को खुला रखा जाता है और साथ ही पत्र बँधे हुए रहते हैं, जिससे इनके निकलने की आशंका रहती है, अत: पत्र असुरक्षित रहते हैं।
  2. वर्गीकरण का अभाव इस प्रणाली में पत्रों को वर्गीकृत नहीं किया जाता है। इससे पत्रों को ढूंढने में असुविधा होती है।
  3. गोपनीयता का अभाव पड़ी फाइलिंग प्रणाली में अन्य प्रणालियों की तुलना में गोपनीयता का अभाव पाया जाता है।
  4. पत्र फटने का भय इस प्रणाली में पत्रों के बँधे होने के कारण उनके फटने का भय बना रहता है।
  5. लोचता पड़ी फाइलिंग प्रणाली में अन्य प्रणालियों से कम लोच पाई जाती है।
  6. पुरानी प्रणाली यह प्रणाली बहुत पुरानी है और अब यह बड़े व्यापारियों के लिए अनुपयुक्त सिद्ध हो गई है।

प्रश्न 2.
खड़ी फाइलिंग प्रणाली के गुण एवं दोषों का वर्णन कीजिए। (2007)
उत्तर:
नस्तीकरण की खड़ी फाइल प्रणाली के गुण नस्तीकरण की खड़ी फाइल प्रणाली के गुण निम्न हैं

  1. पत्रों को सुरक्षित रहना इस प्रणाली के अन्तर्गत पत्रों को फोल्डर में रखा जाता है, जिससे उनके कटने-फटने या आपस में मिल जाने का भय नहीं रहता है। अत: इस प्रणाली के उपयोग से पत्र सुरक्षित रहते हैं।
  2. पत्रों को निकालने व पुनः रखने में सुविधा इस प्रणाली में संकेत कार्ड द्वारा पत्रों को सरलता से प्राप्त किया जा सकता है वे अनुपस्थिति कार्ड के उपयोग द्वारा सरलता से पुनः रखा जा सकता है। अतः इस फाइल प्रणाली में पत्रों को लगाने एवं निकालने में समय एवं श्रम कम लगती है।
  3. सुव्यवस्थित व वैज्ञानिक प्रणाली यह प्रणाली सुव्यवस्थित एवं वैज्ञानिक है। अतः यह फाइलिंग की सबसे उत्तम, आधुनिक तथा सर्वश्रेष्ठ प्रणाली मानी जाती है।
  4. लोचदार प्रणाली यह प्रणाली लोचदार है। इसमें फोल्डरों की संख्या को आवश्यकतानुसार घटाया-बढ़ाया जा सकता है।
  5. गोपनीयता का गुण इस प्रणाली में अलमारी एवं ताले की व्यवस्था होती है, जिससे पत्रों की गोपनीयता बनी रहती है।

नस्तीकरण की खड़ी फाइल प्रणाली के दोष नस्तीकरण की खड़ी फाइल प्रणाली के दोष निम्न हैं-

  1. पत्रों के बिखरने का भय इस प्रणाली के अन्तर्गत पत्रों को फोल्डर में खुला ही रखा जाता है, जिससे पत्रों के बिखरने का भय लगा रहता है।
  2. ढूँढने में समय लगना इस प्रणाली में यदि फोल्डर गलत स्थान पर रख दिया जाता है, तो उसे ढूंढने में अधिक समय वे श्रम लगता है।
  3. अधिक स्थान की आवश्यकता इस प्रणाली में लकड़ी या लोहे की अलमारी का प्रयोग किया जाता है, जो बहुत अधिक स्थान घेरती है।
  4. खर्चीली प्रणाली यह प्रणाली अधिक खर्चीली होती है, छोटे व्यवसायी इसका उपयोग नहीं कर पाते हैं।
  5. तकनीकी ज्ञान की आवश्यकता इस प्रणाली हेतु विशेष तकनीकी ज्ञान एवं प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है।

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (8 अंक)

प्रश्न 1.
नस्तीकरण क्या है? नस्तीकरण के उद्देश्यों को भी लिखिए। (2014)
अथवा
नस्तीकरण की परिभाषा दीजिए। नस्तीकरण के क्या-क्या लाभ हैं? संक्षेप में वर्णन कीजिए। (2011)
अथवा
फाइलिंग से आप क्या समझते हैं? फाइलिंग के उद्देश्यों का वर्णन कीजिए। (2009)
उत्तर:
नस्तीकरण का अर्थ नस्तीकरण (Filing) विधि के अन्तर्गत आने वाले तथा जाने वाले व्यावसायिक पत्रों अथवा उनकी प्रतिलिपियों को इस प्रकार सुरक्षित रखा जाता है, जिससे कि आवश्यकता पड़ने पर किसी भी पत्र अथवा प्रतिलिपि को सरलतापूर्वक एवं शीघ्रता से प्राप्त किया जा सके। प्रो. मिल्स एवं स्टैडिंग फोर्ड के अनुसार, “नस्तीकरण वह कला है, जिसके द्वारा व्यापार सम्बन्धी सभी पत्रों तथा उनसे सम्बन्धित सभी मौलिक पत्रों अथवा उनकी प्रतिलिपियों को इस प्रकार से रखा जाता है कि भविष्य में आवश्यकता पड़ने पर इच्छित पत्र को शीघ्रता से प्राप्त किया जा सके।”

नस्तीकरण के उद्देश्य या लाभ नस्तीकरण के उद्देश्य एवं लाभ निम्नलिखित है।

  1. पत्रों की सुरक्षा व्यापारिक पत्रों एवं दस्तावेजों को नस्तीकरण की विधि अपनाकर सुरक्षित रखा जा सकता है। नस्तीकरण के कारण पत्रों व प्रलेखों के इधर-उधर होने, चोरी होने, खो जाने, आदि का भय कम हो जाता है।
  2. पुनः आदेशों की पूर्ति के लिए पुनः आदेशों की पूर्ति के लिए पुराने ग्राहक प्रायः अपने पूर्व पत्र का सन्दर्भ देकर माल पुनः भेजने का आदेश देते हैं। ऐसी स्थिति में यदि उनके पिछले आदेश फाइल में नहीं होंगे, तो व्यापारी तथा ग्राहक दोनों को असुविधा होगी।
  3. भविष्य में सन्दर्भ के लिए पत्रों को सँभालकर रखे जाने से भविष्य में मतभेद होने पर परस्पर पत्र-व्यवहार सहायक सिद्ध होता है।
  4. पत्रों को क्रमबद्ध करने के लिए कार्यालय में पत्रों को एक निश्चित रूप से क्रमबद्ध करके रखा जाता है। इससे इनको देखने में सरलता रहती है। पत्रों की क्रमबद्धता के लिए पत्रों का नस्तीकरण आवश्यक हो जाता है।
  5. व्यापार के कम होने का कारण ज्ञात करना व्यापार के कम होने पर पिछले पत्रों एवं खातों को देखकर उसका कारण ज्ञात किया जा सकता है।
  6. अनुक्रमणिका का आधार नस्तीकरण अनुक्रमणिका का आधार है, इसलिए पत्र-व्यवहार में अनुक्रमणिका प्रणाली को अपनाने के लिए नस्तीकरण अत्यन्त आवश्यक है।
  7. पत्रों को निकालने की सुविधा नस्तीकरण की विधि द्वारा इच्छित पत्रों को आवश्यकता के समय शीघ्रता से तथा सुगमतापूर्वक निकाला जा सकता है। अन्यथा पत्रों को ढूंढने में समय और शक्ति दोनों नष्ट होते हैं।
  8. विकास योजनाएँ बनाने में सहायक विभिन्न प्रकार की विकास योजनाओं . के निर्माण के लिए भी पुराने पत्रों एवं प्रलेखों का उपयोग किया जाता है। ये पुराने दस्तावेज कई प्रकार की उपयोगी सूचनाएँ प्रदान करते हैं।
  9. तुलनात्मक अध्ययन के लिए समय-विशेष की आर्थिक स्थिति या | लाभ-हानि का तुलनात्मक अध्ययन उसी दशा में सम्भव हो सकता है, जबकि पुराना रिकॉर्ड या पत्र-व्यवहार सँभालकर रखा गया हो।
  10. न्यायालय में प्रमाण के लिए यदि किसी व्यापारी द्वारा किसी समय न्यायालय में वाद प्रस्तुत किया जाता है, तो पत्रों की प्रतिलिपियों को साक्ष्य या प्रमाण के रूप में न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जा सकता है। अत: नस्तीकरण द्वारा ही पत्रों को आसानी से खोजा जा सकता है।
  11. वैधानिक आवश्यकता कुछ पत्र ऐसे होते हैं, जिन्हें कानूनन सुरक्षित रखना आवश्यक होता है; जैसे- बैनामे, रहन-नामे, बीमा-पत्र, वसीयतनामे, आदि।
  12. सरकार को आवश्यक सूचना भेजने में सहायता देना बहुत से पत्रों को सरकारी आज्ञानुसार सुरक्षित रखना पड़ता है। इनकी सहायता से सरकार द्वारा समय-समय पर माँगी जाने वाली वांछित सूचना सरलता से भेजी जा सकती है।

प्रश्न 2.
नस्तीकरण से आप क्या समझते हैं? एक अच्छी नस्तीकरण प्रणाली की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए। (2009, 08)
उत्तर:
नस्तीकरण का अर्थ नस्तीकरण (Filing) विधि के अन्तर्गत आने वाले तथा जाने वाले व्यावसायिक पत्रों अथवा उनकी प्रतिलिपियों को इस प्रकार सुरक्षित रखा जाता है, जिससे कि आवश्यकता पड़ने पर किसी भी पत्र अथवा प्रतिलिपि को सरलतापूर्वक एवं शीघ्रता से प्राप्त किया जा सके। प्रो. मिल्स एवं स्टैडिंग फोर्ड के अनुसार, “नस्तीकरण वह कला है, जिसके द्वारा व्यापार सम्बन्धी सभी पत्रों तथा उनसे सम्बन्धित सभी मौलिक पत्रों अथवा उनकी प्रतिलिपियों को इस प्रकार से रखा जाता है कि भविष्य में आवश्यकता पड़ने पर इच्छित पत्र को शीघ्रता से प्राप्त किया जा सके।”

नस्तीकरण के उद्देश्य या लाभ नस्तीकरण के उद्देश्य एवं लाभ निम्नलिखित है।

  1. पत्रों की सुरक्षा व्यापारिक पत्रों एवं दस्तावेजों को नस्तीकरण की विधि अपनाकर सुरक्षित रखा जा सकता है। नस्तीकरण के कारण पत्रों व प्रलेखों के इधर-उधर होने, चोरी होने, खो जाने, आदि का भय कम हो जाता है।
  2. पुनः आदेशों की पूर्ति के लिए पुनः आदेशों की पूर्ति के लिए पुराने ग्राहक प्रायः अपने पूर्व पत्र का सन्दर्भ देकर माल पुनः भेजने का आदेश देते हैं। ऐसी स्थिति में यदि उनके पिछले आदेश फाइल में नहीं होंगे, तो व्यापारी तथा ग्राहक दोनों को असुविधा होगी।
  3. भविष्य में सन्दर्भ के लिए पत्रों को सँभालकर रखे जाने से भविष्य में मतभेद होने पर परस्पर पत्र-व्यवहार सहायक सिद्ध होता है।
  4. पत्रों को क्रमबद्ध करने के लिए कार्यालय में पत्रों को एक निश्चित रूप से क्रमबद्ध करके रखा जाता है। इससे इनको देखने में सरलता रहती है। पत्रों की क्रमबद्धता के लिए पत्रों का नस्तीकरण आवश्यक हो जाता है।
  5. व्यापार के कम होने का कारण ज्ञात करना व्यापार के कम होने पर पिछले पत्रों एवं खातों को देखकर उसका कारण ज्ञात किया जा सकता है।
  6. अनुक्रमणिका का आधार नस्तीकरण अनुक्रमणिका का आधार है, इसलिए पत्र-व्यवहार में अनुक्रमणिका प्रणाली को अपनाने के लिए नस्तीकरण अत्यन्त आवश्यक है।
  7. पत्रों को निकालने की सुविधा नस्तीकरण की विधि द्वारा इच्छित पत्रों को आवश्यकता के समय शीघ्रता से तथा सुगमतापूर्वक निकाला जा सकता है। अन्यथा पत्रों को ढूंढने में समय और शक्ति दोनों नष्ट होते हैं।
  8. विकास योजनाएँ बनाने में सहायक विभिन्न प्रकार की विकास योजनाओं . के निर्माण के लिए भी पुराने पत्रों एवं प्रलेखों का उपयोग किया जाता है। ये पुराने दस्तावेज कई प्रकार की उपयोगी सूचनाएँ प्रदान करते हैं।
  9. तुलनात्मक अध्ययन के लिए समय-विशेष की आर्थिक स्थिति या | लाभ-हानि का तुलनात्मक अध्ययन उसी दशा में सम्भव हो सकता है, जबकि पुराना रिकॉर्ड या पत्र-व्यवहार सँभालकर रखा गया हो।
  10. न्यायालय में प्रमाण के लिए यदि किसी व्यापारी द्वारा किसी समय न्यायालय में वाद प्रस्तुत किया जाता है, तो पत्रों की प्रतिलिपियों को साक्ष्य या प्रमाण के रूप में न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जा सकता है। अत: नस्तीकरण द्वारा ही पत्रों को आसानी से खोजा जा सकता है।
  11. वैधानिक आवश्यकता कुछ पत्र ऐसे होते हैं, जिन्हें कानूनन सुरक्षित रखना आवश्यक होता है; जैसे- बैनामे, रहन-नामे, बीमा-पत्र, वसीयतनामे, आदि।
  12. सरकार को आवश्यक सूचना भेजने में सहायता देना बहुत से पत्रों को सरकारी आज्ञानुसार सुरक्षित रखना पड़ता है। इनकी सहायता से सरकार द्वारा समय-समय पर माँगी जाने वाली वांछित सूचना सरलता से भेजी जा सकती है।

उत्तर:
नस्तीकरण का अर्थ इसके लिए दीर्घ उत्तरीय प्रश्न 1 देखें। एक अच्छी नस्तीकरण/फाइलिंग प्रणाली की प्रमुख विशेषताएँ एक आदर्श नस्तीकरण प्रणाली में निम्नलिखित गुण या विशेषताएँ होनी चाहिए

  1. सरलता नस्तीकरण प्रणाली में सरलता होनी चाहिए, जिससे इसे आसानी से समझा जा सके और प्रत्येक व्यक्ति बिना किसी विशेष प्रशिक्षण के इसे प्रयोग कर सके।
  2. मितव्ययिता नस्तीकरण प्रणाली मितव्ययी होनी चाहिए, जिससे कि इसे अपनाने में अधिक व्यय न करना पड़े।
  3. सुरक्षा पत्रों को धूल, मिट्टी, पानी, आग, कीड़े-मकोड़े, दीमक, आदि से सुरक्षित रखा जाना चाहिए। नस्तीकरण प्रणाली में ताले लगाने की भी व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि किसी भी महत्त्वपूर्ण पत्रों व प्रलेखों, आदि की चोरी न हो।सके।
  4. लोचदार नस्तीकरण प्रणाली इस प्रकार की होनी चाहिए, कि उसमें व्यापार की क्षमता के अनुसार वृद्धि या कमी की जा सके, क्योंकि पत्र-व्यवहार की कोई निश्चित सीमा नहीं होती। पत्र कभी अधिक तो कभी कम हो सकते है।
  5. शीघ्रता नस्तीकरण प्रणाली इस प्रकार की होनी चाहिए, जिससे कि आवश्यकता के समय पत्रों को शीघ्रता से रखा और निकाला जा सके।
  6. अल्प स्थान नस्तीकरण में पत्र संग्रह प्रणाली इस प्रकार होनी चाहिए, जिसमें | अल्प स्थान की आवश्यकता हो तथा व्यापारी को अधिक स्थान की व्यवस्था ने करनी पड़े।
  7. शीघ्र पहुँच नस्तीकरण का कार्य ऐसी जगह पर होना चाहिए, जहाँ पहुँचने में किसी भी कर्मचारी को किसी भी प्रकार की कठिनाई न हो।
  8. गोपनीयता नस्तीकरण प्रणाली ऐसी होनी चाहिए, जिससे कि पत्र-व्यवहार गोपनीय रखा जा सके तथा बाहर का कोई भी व्यक्ति सरलतापूर्वक उसे देख न सके।
  9. अनुकूलता वही नस्तीकरण प्रणाली आदर्श मानी जाती है, जो व्यापार के अनुकूल हो, जैसे कि एक छोटे व्यापारी के लिए पट फाइलिंग उत्तम रहती है।
  10. टिकाऊपन आदर्श फाइलिंग प्रणाली में टिकाऊपन का गुण होना अत्यन्त आवश्यक होता है, ताकि एक बार व्यय करके दीर्घकाल तक पत्रों को सुरक्षित रखा जा सके।

प्रश्न 3.
लेटी हुई फाइलिंग प्रणाली की विभिन्न पद्धतियों का वर्णन कीजिए। (2007)
उत्तर:
लेटी हुई फाइल प्रणाली इस प्रणाली का आजकल सबसे अधिक प्रयोग होता है। छोटे तथा मध्यम श्रेणी के व्यापारी, पेशेवर व्यक्ति, सरकारी कार्यालय, स्कूल व छोटे कॉलेज, आदि सभी अधिकांश रूप से इस प्रणाली का प्रयोग करते हैं। लेटी हुई फाइलिंग प्रणाली की विभिन्न पद्धतियाँ/प्रकार नस्तीकरण की लेटी या पट प्रणालियाँ निम्नलिखित पद्धतियाँ/प्रकार की हो सकती हैं-

1. तार फाइल नस्तीकरण की यह सबसे सस्ती, सरल एवं प्राचीन पद्धति है। यह फाइल एक तकली की भाँति होती है। इसमें एक मोटे तार का प्रयोग किया जाता है, जिसका ऊपर का सिरा नुकीला और मुड़ा हुआ होता है। इसके निचले सिरे पर लकड़ी का एक गोल या चौकोर टुकड़ा लगा रहता है। कभी-कभी नीचे से तार को मोड़कर भी काम चलाया जा सकता है। तार के ऊपर नुकीले सिरे से पत्रों को पिरोया जाता हैं, जो नीचे तख्ती पर टिकते जाते हैं। बाद में इस तार को किसी कील या बँटी पर लटका दिया जाता है। यह प्रणाली तार फाइल छोटे व्यापारियों के लिए उपयुक्त रहती है।
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2. फोल्डर फाइल यह फाइल एक मोटे गत्ते की बनी होती है। गत्ता बीच में से मोड़ देते हैं, जिससे दोनों परतें बराबर हो जाती हैं, इसलिए इसे फोल्डर फाइल कहा जाता है। यह निम्नलिखित दो प्रकार की होती है

  1. टैग वाली फाइल इस फाइल में दफ्ती के एक कोने पर एक छिद्र होता है, जिसमें एक टैग लगा होता है। इसमें पत्रों को लगाने से पूर्व छिद्रक मशीन के द्वारा छिद्र कर लिया जाता है और तब उस पत्र को टैग में पिरोकर फाइल में लगा दिया जाता है। इसमें भी पत्र तिथिवार लगाए जाते हैं।
  2. टीन की पत्ती वाली फाइल इसमें दफ्ती के मध्य में दो छेद होते हैं, जिसमें एक टीन की पत्ती लगी होती है। इस पत्ती में ऊपर से एक छिद्र वाली पत्ती और लगा दी जाती है। इस पत्ती को कसने के लिए दो रिंग लगाए जाते हैं। पत्रों को मशीन द्वारा छिद्र करके पत्ती में पिरोकर ऊपर से दूसरी पत्ती डालकर रिंग्स को कस दिया जाता है।
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3. कार्ड-बोर्ड या दफ्ती की फाइल यह मोटी दफ्ती के कागज की 1 फीट लम्बी व लगभग 9 इंच चौड़ी फाइल होती है। इस दफ्ती में दोनों ओर मध्य में रैक्सीन के टुकड़े लगे होते हैं, जिनके ऊपर बीच में एक फीता लगा होता है। पत्र को एक के ऊपर एक क्रमवार रखकर फीते से बाँध दिया जाता है। पत्रों का विषय दफ्ती के दोनों ओर लगे कागजों पर लिख दिया जाता है, अधिक सुरक्षा के लिए इसे अलमारी में रख दिया जाता है। यह प्रणाली केवल छोटे व्यापारियों के लिए ही उपयुक्त है।
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4. लोहे की मुड़ी हुई शलाकाओं वाली फाइल यह मोटे गत्ते की फाइल होती है, जो बीच में से मुड़ी हुई होती है। इसमें कुछ दूरी पर दो लोहे की खोखली सलाखें लगी होती हैं। इन सलाखों के पास एक लीवर लगा होता है, जिसे दबाने से सलाखें खुलती एवं बन्द होती हैं। इसमें पत्रों को लगाने से पूर्व पत्रों में छिद्रक मशीन से दो छिद्र कर दिए जाते हैं और फिर उन पत्रों को इन सलाखों में पिरो दिया जाता है। इसी प्रकार, जब किसी पत्र को निकालना होता है, तब इन सलाखों को खोलकर निकाल लिया जाता है। यह प्रणाली छोटे व्यापारियों के लिए उपयुक्त मानी जाती है।
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5. शैनन फाइल लेटी हुई फाइलों में सबसे उत्तम प्रणाली ‘शैनन फाइल’ की होती है। इस फाइल के लिए एक दराजदार अलमारी प्रयोग में लाई जाती है। इस अलमारी में 4 से 24 दराजों वाले खाने हो सकते हैं। प्रत्येक दराज केवल आगे से बन्द होती है तथा उसमें बाहर दीवार पर एक छोटा-सा टीन का फ्रेम लगा होता है, जिसमें सूची-पत्र लगा होता है। दराज के भीतरी ओर तलों से दो सीधी कीलें निकली होती हैं, जिन पर दो मुड़ी हुई सलाखें होती हैं। इन सलाखों को एक लीवर से दबाकर उठाया जाता है। दराजों के नीचे लोहे की रेलें लगी होती हैं तथा दराजों में छोटे-छोटे पहिए लगे होते हैं, जिससे कि दराज बाहर निकलकर गिर न जाए। इसमें ताला लगाने की व्यवस्था भी होती है।
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6. कबूतर के खानों वाली फाइल इस प्रणाली को ‘पिजन होल प्रणाली’ भी । कहते हैं। यह प्रणाली:अत्यन्त प्राचीन है। इसका प्रयोग छोटे तथा मध्यम वर्ग के व्यापारियों द्वारा किया जाता है। नस्तीकरण की इस प्रणाली में एक लकड़ी की अलमारी प्रयोग में लाई जाती है। इस अलमारी में कबूतर के दड़बों जैसे 24 छोटे-छोटे खाने बने होते हैं, इसीलिए इसे ‘कबूतर के खानों वाली फाइल’ भी कहते हैं। प्रत्येक खाने के बाहर वर्णमाला का एक अक्षर लिखा होता है। अन्तिम खाना X, Y, Z तीन अक्षरों के लिए होता है। पत्रों की सुरक्षा के लिए इस अलमारी को बन्द करने के लिए दरवाजा एवं ताले की व्यवस्था भी की जाती है।
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7. सन्दूकनुमा या बॉक्स फाइल यह एक सन्दूकनुमा फाइल होती है। यह सन्दूक मजबूत मोटे गत्ते, लकड़ी अथवा लोहे का बना होता है। कुछ सन्दूकों में पत्रों को दबाकर रखने के लिए स्प्रिग भी लगी होती है। पत्र बिना बँधे एक के ऊपर एक क्रम में रखे जाते हैं। पत्रों को सन्दूक में बन्द कर दिया जाता है, जिससे वह कीड़े-मकोड़े, दीमक, मिट्टी, आदि से सुरक्षित रहें।
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8. गार्ड फाइल यह फाइल एक सामान्य रजिस्टर की भाँति होती है, जिसमें कागज की आधी कटी हुई कुछ कतरनें लगी रहती हैं। इन कतरनों पर ही। पत्रों या प्रलेखों को तिथिवार चिपकाया जाता है। डॉकेटिंग पत्रों को मोड़ने के बाद उसके ऊपर हवाले के रूप में संक्षिप्त विवरण लिखा जाता है, जो डॉकेटिंग कहलाता है।

प्रश्न 4.
नस्तीकरण की खड़ी व पड़ी प्रणाली में अन्तर बताइए तथा एक अच्छी फाइलिंग प्रणाली की प्रमुख विशेषताएँ बताइए। (2008)
उत्तर:
खड़ी फाइल तथा लेटी फाइल प्रणाली में अन्तर
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एक अच्छी फाइलिंग प्रणाली की विशेषताएँ
लेटी हुई फाइल प्रणाली इस प्रणाली का आजकल सबसे अधिक प्रयोग होता है। छोटे तथा मध्यम श्रेणी के व्यापारी, पेशेवर व्यक्ति, सरकारी कार्यालय, स्कूल व छोटे कॉलेज, आदि सभी अधिकांश रूप से इस प्रणाली का प्रयोग करते हैं। लेटी हुई फाइलिंग प्रणाली की विभिन्न पद्धतियाँ/प्रकार नस्तीकरण की लेटी या पट प्रणालियाँ निम्नलिखित पद्धतियाँ/प्रकार की हो सकती हैं-

1. तार फाइल नस्तीकरण की यह सबसे सस्ती, सरल एवं प्राचीन पद्धति है। यह फाइल एक तकली की भाँति होती है। इसमें एक मोटे तार का प्रयोग किया जाता है, जिसका ऊपर का सिरा नुकीला और मुड़ा हुआ होता है। इसके निचले सिरे पर लकड़ी का एक गोल या चौकोर टुकड़ा लगा रहता है। कभी-कभी नीचे से तार को मोड़कर भी काम चलाया जा सकता है। तार के ऊपर नुकीले सिरे से पत्रों को पिरोया जाता हैं, जो नीचे तख्ती पर टिकते जाते हैं। बाद में इस तार को किसी कील या बँटी पर लटका दिया जाता है। यह प्रणाली तार फाइल छोटे व्यापारियों के लिए उपयुक्त रहती है।
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2. फोल्डर फाइल यह फाइल एक मोटे गत्ते की बनी होती है। गत्ता बीच में से मोड़ देते हैं, जिससे दोनों परतें बराबर हो जाती हैं, इसलिए इसे फोल्डर फाइल कहा जाता है। यह निम्नलिखित दो प्रकार की होती है

  1. टैग वाली फाइल इस फाइल में दफ्ती के एक कोने पर एक छिद्र होता है, जिसमें एक टैग लगा होता है। इसमें पत्रों को लगाने से पूर्व छिद्रक मशीन के द्वारा छिद्र कर लिया जाता है और तब उस पत्र को टैग में पिरोकर फाइल में लगा दिया जाता है। इसमें भी पत्र तिथिवार लगाए जाते हैं।
  2. टीन की पत्ती वाली फाइल इसमें दफ्ती के मध्य में दो छेद होते हैं, जिसमें एक टीन की पत्ती लगी होती है। इस पत्ती में ऊपर से एक छिद्र वाली पत्ती और लगा दी जाती है। इस पत्ती को कसने के लिए दो रिंग लगाए जाते हैं। पत्रों को मशीन द्वारा छिद्र करके पत्ती में पिरोकर ऊपर से दूसरी पत्ती डालकर रिंग्स को कस दिया जाता है।
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3. कार्ड-बोर्ड या दफ्ती की फाइल यह मोटी दफ्ती के कागज की 1 फीट लम्बी व लगभग 9 इंच चौड़ी फाइल होती है। इस दफ्ती में दोनों ओर मध्य में रैक्सीन के टुकड़े लगे होते हैं, जिनके ऊपर बीच में एक फीता लगा होता है। पत्र को एक के ऊपर एक क्रमवार रखकर फीते से बाँध दिया जाता है। पत्रों का विषय दफ्ती के दोनों ओर लगे कागजों पर लिख दिया जाता है, अधिक सुरक्षा के लिए इसे अलमारी में रख दिया जाता है। यह प्रणाली केवल छोटे व्यापारियों के लिए ही उपयुक्त है।
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4. लोहे की मुड़ी हुई शलाकाओं वाली फाइल यह मोटे गत्ते की फाइल होती है, जो बीच में से मुड़ी हुई होती है। इसमें कुछ दूरी पर दो लोहे की खोखली सलाखें लगी होती हैं। इन सलाखों के पास एक लीवर लगा होता है, जिसे दबाने से सलाखें खुलती एवं बन्द होती हैं। इसमें पत्रों को लगाने से पूर्व पत्रों में छिद्रक मशीन से दो छिद्र कर दिए जाते हैं और फिर उन पत्रों को इन सलाखों में पिरो दिया जाता है। इसी प्रकार, जब किसी पत्र को निकालना होता है, तब इन सलाखों को खोलकर निकाल लिया जाता है। यह प्रणाली छोटे व्यापारियों के लिए उपयुक्त मानी जाती है।
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5. शैनन फाइल लेटी हुई फाइलों में सबसे उत्तम प्रणाली ‘शैनन फाइल’ की होती है। इस फाइल के लिए एक दराजदार अलमारी प्रयोग में लाई जाती है। इस अलमारी में 4 से 24 दराजों वाले खाने हो सकते हैं। प्रत्येक दराज केवल आगे से बन्द होती है तथा उसमें बाहर दीवार पर एक छोटा-सा टीन का फ्रेम लगा होता है, जिसमें सूची-पत्र लगा होता है। दराज के भीतरी ओर तलों से दो सीधी कीलें निकली होती हैं, जिन पर दो मुड़ी हुई सलाखें होती हैं। इन सलाखों को एक लीवर से दबाकर उठाया जाता है। दराजों के नीचे लोहे की रेलें लगी होती हैं तथा दराजों में छोटे-छोटे पहिए लगे होते हैं, जिससे कि दराज बाहर निकलकर गिर न जाए। इसमें ताला लगाने की व्यवस्था भी होती है।
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6. कबूतर के खानों वाली फाइल इस प्रणाली को ‘पिजन होल प्रणाली’ भी । कहते हैं। यह प्रणाली:अत्यन्त प्राचीन है। इसका प्रयोग छोटे तथा मध्यम वर्ग के व्यापारियों द्वारा किया जाता है। नस्तीकरण की इस प्रणाली में एक लकड़ी की अलमारी प्रयोग में लाई जाती है। इस अलमारी में कबूतर के दड़बों जैसे 24 छोटे-छोटे खाने बने होते हैं, इसीलिए इसे ‘कबूतर के खानों वाली फाइल’ भी कहते हैं। प्रत्येक खाने के बाहर वर्णमाला का एक अक्षर लिखा होता है। अन्तिम खाना X, Y, Z तीन अक्षरों के लिए होता है। पत्रों की सुरक्षा के लिए इस अलमारी को बन्द करने के लिए दरवाजा एवं ताले की व्यवस्था भी की जाती है।
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7. सन्दूकनुमा या बॉक्स फाइल यह एक सन्दूकनुमा फाइल होती है। यह सन्दूक मजबूत मोटे गत्ते, लकड़ी अथवा लोहे का बना होता है। कुछ सन्दूकों में पत्रों को दबाकर रखने के लिए स्प्रिग भी लगी होती है। पत्र बिना बँधे एक के ऊपर एक क्रम में रखे जाते हैं। पत्रों को सन्दूक में बन्द कर दिया जाता है, जिससे वह कीड़े-मकोड़े, दीमक, मिट्टी, आदि से सुरक्षित रहें।
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8. गार्ड फाइल यह फाइल एक सामान्य रजिस्टर की भाँति होती है, जिसमें कागज की आधी कटी हुई कुछ कतरनें लगी रहती हैं। इन कतरनों पर ही। पत्रों या प्रलेखों को तिथिवार चिपकाया जाता है। डॉकेटिंग पत्रों को मोड़ने के बाद उसके ऊपर हवाले के रूप में संक्षिप्त विवरण लिखा जाता है, जो डॉकेटिंग कहलाता है।

प्रश्न 4.
नस्तीकरण की खड़ी व पड़ी प्रणाली में अन्तर बताइए तथा एक अच्छी फाइलिंग प्रणाली की प्रमुख विशेषताएँ बताइए। (2008)
उत्तर:
खड़ी फाइल तथा लेटी फाइल प्रणाली में अन्तर
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